Red Sea संकट: EU ने 10 से ज्यादा युद्धपोत तैनात करने की मांग की, हूती खतरे पर चेतावनी

लाल सागर (Red Sea) में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय यूनियन ने बेहद गंभीर चिंता जताई है। ईयू की फॉरेन पॉलिसी चीफ Kaja Kallas ने चेतावनी दी है कि इस समुद्री रास्ते पर सुरक्षा हालात पहले से कहीं ज्यादा खराब हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन Operation Aspides को ठीक से चलाने और खतरों से निपटने के लिए तुरंत 10 से अधिक युद्धपोतों की जरूरत है, जबकि इस समय इलाके में मौजूद जहाजों की संख्या बेहद कम है।
सदस्य देशों को भेजा गया जरूरी पत्र
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने 19 सितंबर 2026 को ईयू के सभी 27 देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों को एक औपचारिक पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने सदस्य देशों से अपील की है कि वे लाल सागर में अपनी नौसेना और वायु सेना की संपत्तियां तुरंत भेजें। उन्होंने बताया कि हूती आंदोलन ने हाल ही में Mocha पोर्ट, Perim Island और Hanish Islands पर अपना नियंत्रण बना लिया है। इन महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जे के कारण बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य पर उनका दबदबा काफी बढ़ गया है। इस रणनीतिक बदलाव का सीधा असर यूरोपीय देशों की सप्लाई चेन और ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।
ऑपरेशन एस्पाइड्स और जहाजों की कमी
यूरोपीय यूनियन ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए फरवरी 2024 में Operation Aspides शुरू किया था। इस मिशन की समयसीमा को आगे बढ़ाकर 28 फरवरी 2027 तक किया गया है। शुरुआत में इस मिशन के लिए कम से कम 10 युद्धपोतों की योजना बनाई गई थी, लेकिन असल में मिशन के पास ज्यादातर समय सिर्फ 3 युद्धपोत ही तैनात रहे हैं। जहाजों की भारी कमी के कारण पूरे समुद्री इलाके की प्रभावी निगरानी करना और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित निकालना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
इटली ने दी थी अलग से कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले पर इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने भी 18 सितंबर 2026 को Kaja Kallas को पत्र लिखकर बेहद सख्त और तुरंत कदम उठाने की मांग की थी। इतालवी रक्षा मंत्री ने यहां तक संकेत दिया था कि अगर यूरोपीय संघ की तरफ से कागजी और प्रशासनिक देरी जारी रही, तो इटली अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए खुद स्वतंत्र एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू करने पर विचार कर सकता है। बिगड़ते सुरक्षा माहौल को देखते हुए अब Aspides मिशन में शामिल सभी जहाजों के लिए अलर्ट लेवल बढ़ा दिया गया है।
मिशन की भूमिका और व्यापार पर असर
यूरोपीय संघ की सुरक्षा नीति के तहत Operation Aspides पूरी तरह से एक रक्षात्मक मिशन के रूप में काम करता है। इसका मुख्य काम कार्गो जहाजों को सुरक्षित निकालना, संभावित हमलों से जहाजों की रक्षा करना और हथियारों की अवैध तस्करी से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना है। बाब अल-मंदेब जलमार्ग से दुनिया का एक बड़ा व्यापार और कच्चा तेल गुजरता है। इस रास्ते में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है, जिससे वैश्विक बाजार में सामान और ईंधन महंगा होने लगता है। ईयू प्रमुख का कहना है कि यूरोपीय हितों की रक्षा के लिए अब मजबूत नौसैनिक और हवाई शक्ति की तैनाती बेहद जरूरी हो गई है।