UN General Assembly: यूरोपीय संघ ने अमेरिका से फलस्तीनी प्रतिनिधिमंडल का वीज़ा अस्वीकार करने का फैसला बदलने को कहा.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से पहले अमेरिका द्वारा फलस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को वीज़ा देने से इनकार करने के मामले में यूरोपीय संघ ने आधिकारिक तौर पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। 19 सितंबर 2026 को सामने आए इस बयान में यूरोपीय संघ ने वॉशिंगटन से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से बड़ी चर्चा छेड़ दी है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौतों के तहत मेज़बान देश की कुछ विशेष ज़िम्मेदारियां होती हैं।
अमेरिका का वीज़ा देने से इनकार
अमेरिकी विदेश विभाग ने 17 सितंबर 2026 को यह घोषणा की थी कि वह लगातार दूसरे वर्ष फलस्तीनी नेता Mahmoud Abbas और उनके प्रतिनिधिमंडल को देश में प्रवेश के लिए वीज़ा नहीं देगा। अमेरिकी प्रशासन के इस कदम के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक मतदान कराया गया जिसमें 152-3 के भारी बहुमत से Mahmoud Abbas को वर्चुअल माध्यम से यानी ऑनलाइन तरीके से सत्र को संबोधित करने की अनुमति दी गई। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी 18 सितंबर 2026 को इस फैसले पर अफसोस जताया और चिंता व्यक्त की कि इससे फलस्तीन राज्य की संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों में हिस्सा लेने की क्षमता पर असर पड़ता है।
वॉशिंगटन का पक्ष और कारण
अमेरिकी अधिकारियों ने वीज़ा न देने के अपने फैसले के पीछे फलस्तीनी प्राधिकरण और फलस्तीन मुक्ति संगठन यानी पीएलओ द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने का हवाला दिया। वॉशिंगटन का विशेष रूप से कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के माध्यम से संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा इजराइलियों पर हमलों के दोषी ठहराए गए कैदियों के परिवारों को लगातार वित्तीय सहायता देना और एकतरफा तरीके से राज्य की मान्यता हासिल करके द्विपक्षीय बातचीत को दरकिनार करने की कोशिशें भी इसकी मुख्य वजहों में शामिल हैं। अमेरिका का यह भी कहना है कि उसकी विदेश नीति, सुरक्षा और उग्रवाद से जुड़ी चिंताएं उसे ऐसे कदम उठाने की अनुमति देती हैं, हालांकि इन पाबंदियों का असर संयुक्त राष्ट्र में पीएलओ ऑब्जर्वर मिशन के लिए नियुक्त कर्मियों पर नहीं पड़ेगा।
फलस्तीनी विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
फलस्तीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे शांति स्थापना के प्रयासों में बाधा डालने वाला एक अनुचित कदम करार दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला हाल ही में किए गए संस्थागत सुधारों को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की उच्च स्तरीय आम बहस आधिकारिक तौर पर मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को शुरू होने वाली है, जिससे पहले इस राजनीतिक खींचतान ने वैश्विक कूटनीति का पारा चढ़ा दिया है।