UNGA Visa Denials: अमेरिका ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को नहीं दिया वीज़ा, यूरोपीय संघ ने जताई गहरी नाराजगी.

संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में शामिल होने आ रहे फिलिस्तीनी अधिकारियों को अमेरिका द्वारा वीज़ा देने से इनकार करने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूरोपीय संघ यानी EU ने इस फैसले पर अपनी औपचारिक नाराजगी जताई है और अमेरिका से अपने फैसले पर फिर से विचार करने की बात कही है। यह लगातार दूसरा साल है जब फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को अमेरिका में होने वाली इस बड़ी बैठक में शामिल होने से रोका गया है। इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और सभी देश इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आपत्ति
यूरोपीय संघ के प्रवक्ता Anouar El Anouni ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर सभी की भागीदारी होना बेहद जरूरी है ताकि मिलकर समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। यूरोपीय संघ ने अमेरिका को याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय समझौते के तहत उसे एक मेजबान देश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए और वीज़ा से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी इस फैसले पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के फैसलों से फिलिस्तीन राज्य की संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में हिस्सा लेने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है और काम काज प्रभावित होता है।
अमेरिका ने क्यों उठाया यह सख्त कदम
अमेरिकी विदेश विभाग ने 16 सितंबर से 17 सितंबर 2026 के बीच इन वीज़ा प्रतिबंधों की घोषणा की थी। अमेरिका का कहना है कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन यानी PLO ने जरूरी सुधार नहीं किए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि फिलिस्तीनी पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के जरिए इजराइल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल देने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने 1989 के PLO Commitments Compliance Act और 2002 के Middle East Peace Commitments Act का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवाद से जुड़े लोगों को वित्तीय सहायता देने और पाठ्यपुस्तकों में हिंसा को बढ़ावा देने के कारण यह कदम उठाया गया है।
वर्चुअल माध्यम से संबोधन और अन्य देशों की स्थिति
दूसरी तरफ फिलिस्तीनी अधिकारियों ने इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए वीज़ा रोके जाने की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों से आपसी विश्वास को बहाल करने और दोनों पक्षों के बीच के रिश्तों को सुधारने के प्रयासों को तगड़ा झटका लगता है। हालांकि यात्रा पर प्रतिबंध लगने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र महासभा में 17 सितंबर 2026 को एक बड़ा मतदान हुआ। इसमें 152 के मुकाबले 3 वोटों से यह प्रस्ताव पास किया गया कि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas वर्चुअल यानी वीडियो लिंक के जरिए महासभा को संबोधित कर सकेंगे। पिछले साल भी कुछ ऐसा ही रास्ता अपनाया गया था। खास बात यह है कि इसी महासभा में शामिल होने के लिए अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों को वीज़ा दे दिया था, जिसके बाद से अमेरिका के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं।