यमन के अदन शहर में राष्ट्रपति महल और सऊदी मुख्यालय पर हुए धमाकों में पांच लोगों की मौत और कई घायल

अदन: यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अस्थायी मुख्यालय अदन में 15 और 16 अक्टूबर 2026 को कई जोरदार धमाके हुए। गुरुवार को हुए पहले हमले में अल-माशिक राष्ट्रपति महल को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए। मरने और घायल होने वालों में सुरक्षा गार्ड और नागरिक कर्मचारी शामिल हैं।
महल पर हमले के साथ ही शहर के अल बुराइका जिले में स्थित सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुख्यालय पर भी हमला किया गया। शुक्रवार की रात को भी इस बंदरगाह शहर में तेज धमाके सुनने मिले, जिन्हें संभावित मिसाइल हमला बताया गया है।
हूती समूह यानी अनसरल्लाह से जुड़े यमनी सशस्त्र बलों ने गुरुवार के ऑपरेशनों की जिम्मेदारी ली है। समूह के प्रवक्ता यह्या सारी ने बताया कि उन्होंने अल-माशिक महल के भीतर एक सैन्य संचालन केंद्र और हथियारों के डिपो को निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि सऊदी सैन्य उपस्थिति उनके लिए एक वैध लक्ष्य है। समूह ने अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहरी इलाके को निशाना बनाने की बात भी कही है।
इस हमले के दौरान यमन के प्रधानमंत्री शया अल-ज़िंदानी और उनके कैबिनेट मंत्री सुरक्षित रहे, हालांकि प्रधानमंत्री के दो निजी अंगरक्षक महल हमले में मारे गए। सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्री कासिम बुहैबे ने हताहतों की कुल संख्या की पुष्टि की है।
प्रधानमंत्री अल-ज़िंदानी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे एक कायरतापूर्ण कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमला करने के हूती पैटर्न का हिस्सा है। इसके जवाब में यमनी सरकार ने सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों को सरकारी संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाने और आतंकवादी खतरों से निपटने के आदेश दिए हैं।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने हूती आतंकवादी अभियानों को तुरंत रोकने की मांग की है। गठबंधन ने यह भी जानकारी दी कि रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों में बढ़ोतरी हुई है।
यमन सरकार और सऊदी अधिकारियों ने ईरान पर हूती बलों को समर्थन देकर इस संघर्ष को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और सभी पक्षों से सैन्य गतिविधियों को कम करने का आग्रह किया है।