फारूक अब्दुल्ला ने पश्चिम एशिया के हालात पर जताई चिंता, तेल और गैस सप्लाई रुकने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था हो रही प्रभावित।

Aanya19 September 20263 min read19 viewsIndia
फारूक अब्दुल्ला ने पश्चिम एशिया के हालात पर जताई चिंता, तेल और गैस सप्लाई रुकने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था हो रही प्रभावित।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष Farooq Abdullah ने शनिवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव और जंग के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल इकोनॉमी यानी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था भारी मुश्किलों का सामना कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे प्रयासों के बाद यह लड़ाई जल्द ही खत्म हो जाएगी और पूरी दुनिया में एक बार फिर शांति बहाल होगी।

पहलगाम में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान Farooq Abdullah ने ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे विवाद के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ये संघर्ष लगातार जारी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दुनिया भर के देश इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं, इसलिए यह स्थिति बहुत जल्द सामान्य हो जाएगी। तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से आम जनता और देशों को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और यही कारण है कि पूरी दुनिया इस जंग का अंत चाहती है।

मक्का के पास ड्रोन हमले पर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला

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बातचीत के दौरान उनसे सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास हाल ही में हुए कथित ड्रोन हमले के बारे में भी सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने साफ किया कि अभी तक यह पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस हमले के पीछे असल में किसका हाथ था। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि यमन के हूती विद्रोहियों और ईरान दोनों ने ही इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। उनका यह भी कहना था कि जब ये दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारी से इंकार कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि इस घटना के पीछे कोई और तीसरी ताकत है जो हालात को बिगाड़ने की साजिश रच रही है।

बता दें कि इससे पहले 16 September को यमन के हूती आंदोलन ने सऊदी अरब के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि उन्होंने मक्का की तरफ कोई ड्रोन दागा था। हूती समूह ने सऊदी के इस आरोप को पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत करार दिया था। उनका कहना था कि उनकी तरफ से जो भी सैन्य कार्रवाई की जाती है, वह केवल सऊदी के सैन्य ठिकानों और ऑयल फैसिलिटीज को ध्यान में रखकर होती है, और उनका इस्लामिक पवित्र स्थलों से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं दूसरी ओर, सऊदी अरब के गठबंधन ने दावा किया था कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के पास दक्षिणी इलाके में ही उस ड्रोन को हवा में रोककर तबाह कर दिया था, जिससे वह प्रतिबंधित एयरस्पेस में दाखिल नहीं हो सका।

इन तमाम घटनाओं और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। गल्फ देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए भी इस तरह के तनाव चिंता का विषय बनते हैं क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। Farooq Abdullah ने अपनी बात को खत्म करते हुए एक बार फिर यह उम्मीद जताई कि ईश्वर की कृपा से यह सभी विवाद जल्द ही सुलझ जाएंगे और दुनिया में एक बार फिर अमन और शांति का माहौल बनेगा। इस पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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