अल जजीरा का खुलासा: युद्ध ने कैसे बदल दी गाजा की 15 स्कूली छात्राओं की जिंदगी

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsWorld
अल जजीरा का खुलासा: युद्ध ने कैसे बदल दी गाजा की 15 स्कूली छात्राओं की जिंदगी

एक तस्वीर जो कभी उम्मीदों और सपनों से भरी थी, आज एक गहरे दर्द की कहानी बयां कर रही है। अल जजीरा की एक हालिया जांच रिपोर्ट में गाजा पट्टी के नुसेरात इलाके के मस्कट सेकेंडरी स्कूल की 15 छात्राओं की वर्तमान स्थिति का विवरण दिया गया है। यह जांच उस तस्वीर के तीन साल बाद आई है, जिसमें इन छात्राओं को युद्ध शुरू होने से ठीक पहले देखा गया था। यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एक भीषण संघर्ष ने इन मासूमों के भविष्य को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।

इन छात्राओं की मार्गदर्शक रहीं 43 वर्षीय गणित शिक्षिका महा तहा, जिन्हें शिक्षण का 20 साल का अनुभव है, का कहना है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद की घटनाओं ने इन बच्चों के जीवन की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह के लिए नुकसान बहुत बड़ा रहा है। इन 15 छात्राओं में से एक की मौत इजरायली हवाई हमले में हो गई, जबकि बाकी बचे हुए जीवन के संघर्षों से जूझ रहे हैं।

सपनों की जगह अब सिर्फ दर्द और विस्थापन

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युद्ध की विभीषिका ऐसी थी कि जीवित बची छात्राओं में से केवल चार ही गाजा पट्टी से बाहर निकलने में कामयाब रहीं। बाकी छात्राएं आज भी विस्थापन के दर्द और शिक्षा में आए भारी व्यवधान को झेल रही हैं। इसी समूह की 19 वर्षीय घैदा, जो अब गाजा से बाहर निकल चुकी हैं, की कहानी दिल दहला देने वाली है। घैदा पहले आर्किटेक्चर की पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन युद्ध की परिस्थितियों ने उन्हें अपनी प्राथमिकताएं बदलने पर मजबूर कर दिया।

सितंबर 2025 में घैदा ने मिस्र में दंत चिकित्सा (डेंटिस्ट्री) की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को इसलिए चुना ताकि वे वापस लौटकर गाजा के लोगों की सेवा कर सकें। घैदा ने यह भी साझा किया कि पीछे छूटे अपने दोस्तों की चिंता और मानसिक तनाव के कारण उनका वजन काफी कम हो गया है। वे बस इस इंतजार में हैं कि सीमाएं स्थायी रूप से खुलें और वे अपने घर लौट सकें।

इतना ही नहीं, जिस मस्कट सेकेंडरी स्कूल में ये छात्राएं पढ़ती थीं, वह भी इस तबाही से अछूता नहीं रहा। फरवरी 2024 में इस स्कूल पर गोलाबारी हुई। हालांकि इमारत अभी भी खड़ी है, लेकिन अब यह स्कूल नहीं रहा; बल्कि यह बेघर हुए विस्थापित परिवारों के लिए एक शरण स्थल बन गया है। यह घटना इस क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे के पूरी तरह ढह जाने का एक जीता-जागता प्रमाण है।

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