Flames and smoke reported at Saudi Aramco facility south of Riyadh

सऊदी अरब की ऊर्जा राजधानी से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश की मुख्य राजधानी रियाद के दक्षिण में स्थित एक प्रमुख सऊदी अरामको फैसिलिटी से अचानक आग की लपटें और काला धुआं उठता हुआ देखा गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता की लहर दौड़ गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों और उपग्रहों ने की पुष्टि
शनिवार को हुई इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद कई लोगों और पत्रकारों ने आसमान में भारी काला धुआं और तेज लपटें उठने की पुष्टि की है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतरिक्ष से नजर रखने वाली एजेंसियों के तकनीकी तंत्र ने भी इस घटना को दर्ज किया है।
- नासा के FIRMS सैटेलाइट मॉनिटरिंग सिस्टम ने इस क्षेत्र में उच्च तीव्रता के थर्मल हिट्स दर्ज किए।
- टेरा सैटेलाइट की इमेजरी से भी साइट पर भीषण आग या आपातकालीन फ्लेयरिंग ऑपरेशंस होने के संकेत मिले हैं।
क्षेत्रीय तनाव और अनिश्चितता का माहौल
घटना के सामने आने के बावजूद, अब तक सऊदी अधिकारियों और सऊदी अरामको की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कंपनी ने मीडिया के सवालों पर भी फिलहाल चुप्पी साध रखी है। हालांकि, यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस अकाउंट्स के जरिए कुछ वीडियो फुटेज साझा किए गए हैं, जिनमें इस घटना के पीछे ईरान समर्थित हूती बलों के संभावित हमलों की चर्चा की जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि हूती विद्रोहियों ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।
बढ़ता संघर्ष और तेल आपूर्ति की चिंताएं
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यमन और सऊदी अरब के सीमाई इलाकों में सैन्य टकराव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में यमन की राजधानी सना में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं और दोनों पक्षों के बीच हवाई हमलों का दौर जारी है। क्षेत्रीय और पश्चिमी अधिकारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में इस संघर्ष में और तेजी आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा बाजारों और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं, हालांकि सऊदी अरब पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसे हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी। फिलहाल, हर किसी की निगाहें सऊदी प्रशासन के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हुई हैं।