फुटबॉल में जेंडर समानता की बड़ी बात, महिलाओं के लिए फीफा और यूएएफए ने उठाया बड़ा कदम।

Nura Basta2 September 20263 min read30 viewsWorld
फुटबॉल में जेंडर समानता की बड़ी बात, महिलाओं के लिए फीफा और यूएएफए ने उठाया बड़ा कदम।

फुटबॉल अब केवल खेल का मैदान नहीं रहा, बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके अधिकारों को समझने का एक बड़ा जरिया बन गया है। हाल ही में दोहा डिबेट्स की चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि खेल की दुनिया में भी महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2 सितंबर 2026 को अल जज़ीरा इंग्लिश ने इस विषय पर एक वीडियो फीचर जारी किया, जिसमें खेल के भीतर लैंगिक असमानता के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बात की गई। इससे पहले जून 2026 में दोहा डिबेट्स का एक पॉडकास्ट भी सामने आया था, जिसका विषय था कि फुटबॉल हमें हमारे समाज के बारे में क्या बताता है।

महिला खिलाड़ियों और कर्मियों के सामने आ रही मुश्किलें

महिला अधिकारों और खेल पर नजर रखने वाले संगठनों ने खेल जगत में काम करने वाली महिलाओं के सामने आने वाली दिक्कतों को लगातार दुनिया के सामने रखा है। विमेन इन फुटबॉल यानी WIF की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मई 2024 तक खेल क्षेत्र में काम करने वाली 89 प्रतिशत महिलाओं ने कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना किया था, जबकि साल 2023 में यह आंकड़ा 82 प्रतिशत था। इनमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा सितंबर 2025 में आई एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं को पिछले एक साल के दौरान भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसमें से 71 प्रतिशत महिलाओं ने पुरुषों के वर्चस्व और 66 प्रतिशत ने अंदरूनी पूर्वाग्रह को इसकी मुख्य वजह माना। दूसरी ओर, यूएन वुमन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में रजिस्टर्ड कोचों में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 5 प्रतिशत है। हालांकि सपोर्ट इंटीग्रिटी ग्लोबल अलायंस के साल 2026 के सर्वे से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के कार्यकारी पदों पर अब महिलाएं 32 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं।

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संस्थानों और बड़े संगठनों की तरफ से उठाए जा रहे कदम

इन कमियों को दूर करने के लिए अब बड़े खेल संस्थान भी गंभीर हो गए हैं और लगातार कड़े नियम बना रहे हैं। फीफा ने नियम बनाया है कि उसके सभी 211 सदस्य संघों की कार्यकारी समिति में कम से कम एक महिला का होना अनिवार्य है और यह नियम 2026 तक लागू करना है। इसके साथ ही फीफा का लक्ष्य 2027 तक दुनिया भर में महिलाओं की संख्या 6 करोड़ तक पहुंचाने का है। वहीं यूएएफए ने अपनी अनस्टॉपेबल रणनीति के तहत वित्तीय वर्ष 2026/27 के लिए महिला, युवा और फुटसल प्रतियोगियों पर 77 मिलियन यूरो का निवेश करने का फैसला किया है। इस योजना का मकसद साल 2030 तक महिलाओं की लीग को प्रोफेशनल बनाना और उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। यूएएफए के अध्यक्ष अलेक्जेंडर सेफेरिन और महिला फुटबॉल की निदेशक नादिन केसलर ने खेल के विकास के लिए बड़े पैमाने पर कमर्शियल निवेश की जरूरत पर जोर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी QNA की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

देशों के स्तर पर हो रहा है बदलाव

विभिन्न देशों में भी इस दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। फुटबॉल ऑस्ट्रेलिया ने 2 सितंबर 2026 को अगस्त महीने के लिए अपने क्लब चेंजर ऑफ द मंथ पुरस्कारों का ऐलान किया। इसमें एडिलेड यूनिवर्सिटी सॉकर क्लब, रोजलैंड्स एफसी, एंथम रेडबैक्स एफसी, साउथ टूवूम्बा हॉक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल एफसी जैसे क्लबों को महिलाओं के नेतृत्व और खेल में सबको साथ लेकर चलने के लिए सम्मानित किया गया। इसी तरह मोरक्को में भी क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा सुधार देखा गया है, जहां साल 2022 से 2025 के बीच अफ्रीका में रजिस्टर्ड महिला खिलाड़ियों की संख्या में 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मोरक्को इस समय 2026 महिला अफ्रीका कप ऑफ नेशंस की मेजबानी कर रहा है, जिसमें 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। साथ ही मोरक्को की टीम ने 2027 फीफा महिला विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। इन सबके बावजूद खेलों की मीडिया कवरेज में महिलाओं का हिस्सा आज भी केवल 15 प्रतिशत के आसपास ही है।

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