Saudi Arabia में फ्रांस का बड़ा कदम, Yanbu ऑयल प्लांट की रक्षा के लिए भेजी सेना.

Sushma Kumari25 September 20262 min read8 viewsSaudi
Saudi Arabia में फ्रांस का बड़ा कदम, Yanbu ऑयल प्लांट की रक्षा के लिए भेजी सेना.

सऊदी अरब के लाल सागर के पास स्थित महत्वपूर्ण Yanbu ऑयल प्लांट की सुरक्षा के लिए फ्रांस ने अपनी सैन्य ताकत भेजने का बड़ा फैसला किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को यह ऐलान किया कि फ्रांस अब सऊदी अरब की मदद के लिए अपने सैनिक, रडार सिस्टम और रक्षात्मक उपकरण वहां तैनात करेगा। सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर उठाए गए इस कदम का मुख्य मकसद तेल सुविधाओं को लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखना है। इस क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि लगातार बढ़ते हमलों की वजह से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की की हाई-लेवल डिफेंस मीटिंग

हूती हमलों के बढ़ते खतरे के बाद सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच उच्च स्तरीय रक्षा चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में हुई एक अहम बैठक के दौरान सऊदी विदेश मंत्री राजकुमार फैसल बिन फरहान, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने आपसी सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। इन तीनों देशों ने 7 अगस्त को साइन किए गए 'मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' के तहत देश की रक्षा करने के अधिकार को पूरी तरह सही ठहराया है। इस समझौते के नियमों के मुताबिक यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। आने वाले दिनों में तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों की एक जरूरी बैठक भी आयोजित की जा रही है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए तुर्की के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेलुक बायरकुटारोग्लू खुद सऊदी अरब की यात्रा पर आ रहे हैं। तुर्की की संसद अगले महीने इस समझौते को आधिकारिक रूप से मंजूरी देगी।

युद्ध विराम खत्म होने के बाद बढ़ी चुनौतियां

जुलाई महीने में लंबे समय से चला आ रहा युद्ध विराम खत्म हो गया था, जिसके बाद से क्षेत्र में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। हूती संगठनों द्वारा समुद्र में नाकाबंदी और आने-जाने वाले जहाजों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फवजान अल-फवजान ने देश के सभी सैनिकों को देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा है। हालांकि शुरुआत में यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तान की इस मामले में भूमिका केवल कूटनीतिक स्तर तक ही सीमित रहेगी, लेकिन हूती नेतृत्व की तरफ से तुर्की और पाकिस्तान को सीधे तौर पर सैन्य दखल न देने की चेतावनी भी दी गई है। सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीय और अन्य देशों के प्रवासी मजदूर इन सुरक्षा बदलावों को बहुत ध्यान से देख रहे हैं, क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वहां की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा पड़ता है।

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