सऊदी अरब के तेल केंद्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए फ्रांस ने वहां अपनी सैन्य तैनाती शुरू की

पेरिस: फ्रांस ने सऊदी अरब में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। इस कदम का मुख्य मकसद सऊदी अरब के तेल केंद्रों और ऊर्जा परिवहन नेटवर्क की सुरक्षा को और मजबूत करना है।
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फाव्रेक्स ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पेरिस अब एक सुरक्षा समझौते के परिचालन तत्वों को लागू कर रहा है, हालांकि सैन्य सहायता के पैमाने और स्वरूप के बारे में उन्होंने कोई खास जानकारी साझा नहीं की।
यह तैनाती राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की 24 सितंबर 2026 की घोषणा के बाद हुई है। मैक्रोन ने कहा था कि क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रांस सैनिकों, रडार सिस्टम और डिफेंस सिस्टम मुहैया कराएगा। उन्होंने साफ किया कि यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य केवल महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा करना है, न कि फ्रांस को क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल करना।
एक राजनयिक सूत्र ने दोहराया कि फ्रांस हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे संघर्ष में शामिल नहीं होगा। यह तैनाती मुख्य रूप से ऊर्जा केंद्र रहे तटीय शहर यानबू और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की सुरक्षा पर केंद्रित है, जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर तेल शिपमेंट भेजने के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है।
सऊदी हवाई अड्डों और तेल सुविधाओं पर हूती बलों द्वारा किए गए हालिया हमलों के बाद ये सुरक्षा उपाय किए गए हैं। फ्रांस के अलावा ब्रिटेन और इटली ने भी सऊदी अरब को मामूली सैन्य सहायता की पेशकश की है, क्योंकि क्षेत्रीय तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन अगले हफ्ते एक राजनयिक दौरे पर जाएंगे, जिसमें वह संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और कतर का दौरा करेंगे।