ऑनलाइन दुष्प्रचार पर भड़का फ्रांस, ईरानी राजदूत को तलब कर जताया कड़ा विरोध

फ्रांस और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने पेरिस स्थित ईरानी राजदूत को तलब किया। यह कदम ईरान द्वारा चलाए जा रहे एक कथित ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान के जवाब में उठाया गया है। फ्रांस ने इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है और ईरान की इस हरकत पर औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया है।
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फवेरक्स ने स्पष्ट किया कि ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक खातों के जरिए गलत और भ्रामक सामग्री फैलाई जा रही है, जो किसी भी लिहाज से स्वीकार्य नहीं है। गौरतलब है कि यह तनाव तब बढ़ा जब इससे पहले मंगलवार, 6 अक्टूबर को तेहरान ने फ्रांस के राजदूत पियरे कोचार्ड को तलब किया था। हालांकि, फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के निर्देश पर फ्रांस ने ईरान के उस कदम को "आधारहीन" करार देते हुए खारिज कर दिया और तेहरान के आरोपों को "अपमानजनक उकसावा" बताया।
छात्र प्रदर्शन और मानवाधिकारों पर छिड़ी जंग
इस पूरे विवाद की जड़ फ्रांस में सितंबर के अंत से चल रहे छात्र प्रदर्शन हैं। छात्र स्टाफ की कमी, कक्षाओं में अत्यधिक भीड़ और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। ईरान ने इन प्रदर्शनों पर फ्रांस की प्रतिक्रिया की आलोचना की है।
- ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने फ्रांस पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाया।
- तेहरान का दावा है कि फ्रांस में प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक व्यवहार किया गया और मानवाधिकारों का व्यापक उल्लंघन हुआ।
- दूसरी ओर, फ्रांस के आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
फ्रांसीसी गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस केवल उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप करती है जहाँ संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जाता है या हिंसा होती है। उन्होंने इन प्रदर्शनों को "अभूतपूर्व" बताया है, लेकिन पुलिसिया बर्बरता के दावों को पूरी तरह गलत करार दिया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच यह जुबानी जंग और राजनयिक खींचतान जारी है।