Freedom Flotilla Coalition का बड़ा ऐलान, अक्टूबर 2026 में गाजा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए शुरू हुआ नया मिशन.

Aanya5 September 20263 min read31 viewsWorld
Freedom Flotilla Coalition का बड़ा ऐलान, अक्टूबर 2026 में गाजा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए शुरू हुआ नया मिशन.

फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन यानी FFC ने गाजा की नाकाबंदी को चुनौती देने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशन की शुरुआत कर दी है। इस मिशन के तहत कई जहाज इस समय यूरोपीय बंदरगाहों से होते हुए आगे बढ़ रहे हैं और उनकी योजना अक्टूबर 2026 तक गाजा पहुंचने की है। इस संगठन का साफ कहना है कि गाजा पट्टी पर जो इजरायली नाकाबंदी चल रही है, उसे तोड़ना इस समय मानवता के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है, क्योंकि वहां के लोगों को बुनियादी चीजें नहीं मिल पा रही हैं।

जहाजों का सफर और अलग-अलग देशों के बंदरगाह

इस अभियान में कई नावें और जहाज शामिल हैं, जिनमें 'हंदला II' नाम का जहाज भी है। इस जहाज ने पिछले साल जून और जुलाई के दौरान स्कैंडिनेवियाई देशों जैसे नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क का दौरा किया था। इसके अलावा एक दूसरा जहाज 'केट' ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर से अगस्त 2026 में रवाना हुआ था। यह जहाज आयरलैंड, जर्मनी और फ्रांस के कई बंदरगाहों पर रुक चुका है। अब इस गठबंधन की योजना स्पेन, पुर्तगाल और इटली के अन्य बंदरगाहों पर भी जाने की है ताकि वे अपने इस सफर को आगे बढ़ा सकें।

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पेशवरों की भागीदारी

इस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य जोहर चेम्बरलेन रेगेव ने बताया कि यह मिशन इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि दुनिया भर की सरकारें फलस्तीनी लोगों की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में लगातार असफल रही हैं। मेरीलैंड से ताल्लुक रखने वाले एक इंजीनियर एडवर्ड डिजिलियो, जो इस यात्रा में खुद शामिल हैं, उन्होंने माना कि इस रास्ते में कई तरह के गंभीर खतरे हैं। इसके बावजूद उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इस मामले में चुप बैठे रहे, तो उसकी कीमत और भी ज्यादा चुकानी पड़ेगी। इस गठबंधन में मानवाधिकार कार्यकर्ता, डॉक्टर, पत्रकार और ट्रेड यूनियन से जुड़े लोग शामिल हैं, जो सरकारों पर दबाव बना रहे हैं कि वे इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता दें और इजराइल पर कूटनीतिक तथा आर्थिक प्रतिबंध लगाएं ताकि नाकाबंदी खत्म हो सके।

हिंसा की घटनाएं और पुरानी यादें

संगठन ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि इस साल यानी 2026 की वसंत ऋतु में जब ऐसा ही एक मिशन चलाया गया था, तब वहां के स्वयंसेवकों को इजरायली सेना की तरफ से भारी हिंसा का सामना करना पड़ा था। हिरासत में रखे जाने के दौरान उन्हें बुरी तरह पीटा गया, उनकी हड्डियां तोड़ी गईं, गोलियां मारी गईं, बार-बार करंट के झटके दिए गए और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं भी हुईं। इन डरावनी रिपोर्टों के सामने आने के बाद भी गठबंधन का मानना है कि इस दिशा में कदम उठाना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि अक्टूबर 2025 में जब से युद्धविराम का ऐलान हुआ है, तब से गाजा के हालात पर से दुनिया का ध्यान धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

इजराइल का रुख और हथियारों पर रोक की मांग

दूसरी तरफ इजराइल का यह साफ कहना है कि इन फ्लोटिला जहाजों पर केवल प्रतीकात्मक मदद लाई जाती है। इजराइल ने इन जहाजों को बंदरगाह पर उतरने की अनुमति देने से हमेशा इनकार किया है। पिछले अनुभवों में देखा गया है कि उन्होंने ऐसे जहाजों पर कब्जा किया, उसमें बैठे लोगों को गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें देश से बाहर डिपोर्ट कर दिया। इसके बावजूद FFC लगातार यह मांग कर रहा है कि सभी देश इजराइल को हथियारों और ऊर्जा की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दें और उनके साथ सैन्य सहयोग को खत्म कर दें, ताकि इस नाकाबंदी के खिलाफ एक मजबूत रणनीति बनाई जा सके।

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