यमन के ताइज़ शहर में ईंधन की भारी कमी से डायलिसिस केंद्र बंद होने की कगार पर और सैकड़ों मरीजों की जान खतरे में

ताइज़ (यमन): यमन के ताइज़ शहर में ईंधन की भारी किल्लत और जारी घेराबंदी के कारण डायलिसिस मरीजों के सामने जीवन और मृत्यु का संकट खड़ा हो गया है। जरूरी ईंधन न होने की वजह से शहर के मुख्य चिकित्सा केंद्रों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे जीवन रक्षक उपचार मिलना मुश्किल हो गया है।
अल थोरा अस्पताल के किडनी सेंटर ने बताया कि उनके पास मौजूद डायलिसिस का सामान केवल 14 दिनों तक ही चल पाएगा। सेंटर के प्रमुख युसेफ अल-ज़कारी के मुताबिक, किडनी फेल्योर से जूझ रहे करीब 650 मरीजों के साथ-साथ इंटेंसिव केयर और इनक्यूबेटर में मौजूद मरीजों की जान को गंभीर खतरा है।
यह संकट अक्टूबर की शुरुआत से और गहरा गया है जब हूती मिलिशिया ने ताइज़ को सरकारी क्षेत्रों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर नियंत्रण कर लिया। इस घेराबंदी की वजह से शहर में जरूरी सामान की आपूर्ति ठप हो गई है।
यमन के सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय ने 11 और 12 अक्टूबर 2026 को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि चिकित्सा आपूर्ति और ईंधन खत्म होने से डायलिसिस, नवजात शिशुओं की देखभाल, इमरजेंसी और इंटेंसिव केयर सेवाएं पूरी तरह रुक सकती हैं। मंत्रालय ने इस नाकेबंदी को हटाने और मानवीय सहायता व मरीजों के लिए सुरक्षित रास्ता खोलने की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने 13 अक्टूबर को ताइज़ की स्थिति को विनाशकारी बताया और नागरिकों व बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की अपील की। ताइज़ के गवर्नर नबील शमसन ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यमन सरकार से घेराबंदी खत्म कराने के लिए दबाव बनाने को कहा है।
ईंधन की इस कमी का असर सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। शहर में महंगाई काफी बढ़ गई है, पेट्रोल की कीमतें तीन गुना हो गई हैं और खाना पकाने वाली गैस लगभग गायब है।
शहर में फंसे मरीज मामून अब्दुलवाहद नामन ने बताया कि नियमित डायलिसिस न मिल पाने और जारी झड़पों के बीच उन्हें डर है कि उनकी हालत तेजी से बिगड़ सकती है।