Saudi पर हूती विद्रोहियों का हमला, G7 देशों ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी.

हाल ही में यमन के विद्रोही गुट हूती ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों के बाद से पूरी दुनिया में तनाव का माहौल बन गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। इस मामले में अब दुनिया के बड़े देशों का समूह G7 खुलकर सामने आ गया है और उसने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। G7 देशों का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से आम नागरिकों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
G7 देशों की बैठक और साझा बयान
सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में G7 Foreign Ministers ने साफ कहा कि यमन और सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमले क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और लाल सागर (Red Sea) तथा बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा खतरा हैं। इस बयान पर कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि ने भी हस्ताक्षर किए हैं। नेताओं ने हूती विद्रोहियों से तुरंत सभी सैन्य गतिविधियां रोकने और राजनीतिक प्रक्रिया में वापस लौटने की अपील की है।
ईरान की भूमिका पर गंभीर सवाल
G7 समूह ने सीधे तौर पर ईरान को आड़े हाथों लिया है और उसे हूती विद्रोहियों को हथियार देना और उनका समर्थन करना बंद करने को कहा है। समूह का यह भी मानना है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों का उल्लंघन कर रहा है। इन हमलों की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और जरूरी सामानों जैसे भोजन, उर्वरक और ऊर्जा की सप्लाई चेन में भारी बाधा आ सकती है।
सऊदी अरब और यमन का जमीनी घटनाक्रम
यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यह्या सारी कासिम सारी ने 19 सितंबर को जानकारी दी थी कि राजधानी सना पर सऊदी अरब के हमलों के जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि यमन की सेना ने रियाद में संवेदनशील ठिकानों और यानबु (Yanbu) में स्थित अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाकर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन से सफल हमले किए। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कैंप डेविड से अचानक व्हाइट हाउस लौटकर यमन में संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर उच्च स्तरीय बैठक की थी।
दूसरी तरफ, यमन के प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब की सेना ने अल-जौफ, ताइज, सादा और मारिब गवर्नरट पर 157 हवाई और मिसाइल हमले किए। शुरुआत से लेकर अब तक कुल हमलों की संख्या 917 तक पहुंच चुकी है। इस बढ़ते तनाव के बीच G7 देशों ने यमन की वैध सरकार के प्रति अपना समर्थन दोहराया और संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग के शांति प्रयासों का स्वागत किया है ताकि बातचीत के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।