जी7 देश निकालेंगे 10 करोड़ बैरल इमरजेंसी तेल और डीजल

दुनियाभर में ईंधन की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी चेतावनियों के बीच एक बड़ा कदम उठाया गया है। वैश्विक बाजार को स्थिर करने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए जी7 देशों ने अपने रणनीतिक भंडार से भारी मात्रा में ईंधन बाजार में उतारने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इस योजना के तहत लगभग 10 करोड़ बैरल इमरजेंसी तेल और डीजल की आपूर्ति बाजार में की जाएगी, ताकि आम जनता को बढ़ती कीमतों से कुछ राहत मिल सके।
क्यों पड़ी इमरजेंसी तेल भंडार जारी करने की जरूरत?
हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर डीजल और पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। यूरोपीय देशों के सामने ऊर्जा का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यूरोप अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव, क्षेत्रीय रिफाइनरियों के उत्पादन में कमी और यूक्रेन संघर्ष के कारण रूसी ईंधन उत्पादन पर पड़े असर ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। ऐसे में अमेरिका की ओर से डीजल की सप्लाई रोकने की धमकी ने आग में घी का काम किया, जिससे यूरोपीय देशों की चिंताएं और अधिक बढ़ गईं।
क्या है पूरी योजना?
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जी7 के सदस्य देशों ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान इस संकट से निपटने के लिए सहमति जताई है। इस प्रस्ताव के तहत कुल 10 करोड़ बैरल ईंधन बाजार में लाया जाएगा, जिसमें 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 5 करोड़ बैरल डीजल शामिल होगा। शुरुआती दौर में भारी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराया जाएगा ताकि तत्काल राहत मिल सके। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो और निर्यात पर किसी तरह के अनावश्यक प्रतिबंध न लगें।
बाजार पर असर और विशेषज्ञों की राय
जैसे ही यह खबर सामने आई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए, हालांकि बाद में कीमतें फिर से ऊपर चली गईं। कई ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रणनीतिक भंडार जारी करने से इस वैश्विक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इसके लिए मध्य पूर्व और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल की निर्बाध आपूर्ति बहाल करना बेहद जरूरी होगा।