गाजा में स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त होने से ब्रेस्ट कैंसर मरीजों की जान खतरे में, दवाइयों की कमी से इलाज में हो रही भारी देरी

गाजा में स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने से ब्रेस्ट कैंसर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। दवाइयां खत्म हो गई हैं और मशीनें बंद हैं।

Gautam Sahu22 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा में स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त होने से ब्रेस्ट कैंसर मरीजों की जान खतरे में, दवाइयों की कमी से इलाज में हो रही भारी देरी

गाजा: गाजा पट्टी में स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह चरमरा जाने से ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही महिलाओं के लिए संकट खड़ा हो गया है। मेडिकल सामान की भारी कमी और शुरुआती जांच सेवाओं के बंद होने की वजह से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मैमोग्राफी मशीनों और लैब रीजेंट्स की कमी के कारण 1 अक्टूबर 2026 से ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक सेवाएं लगभग बंद हो गई हैं। आमतौर पर तीन साल की अवधि में 1,000 से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार आधे से भी कम मरीजों की पहचान हो पाई है। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं लेकिन उनकी जांच नहीं हो पाई है।

गाजा कैंसर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद इब्राहिम अबू नाडा ने बताया कि डॉक्टरों को एक्सपायर हो चुकी कीमोथेरेपी दवाओं का इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि संकट का असली पैमाना रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।

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अस्पतालों की हालत और खराब हो गई जब 22 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ईंधन खत्म होने से जनरेटर स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं। अल-अजहर ने इस स्थिति को सैकड़ों मरीजों के लिए सामूहिक मृत्युदंड करार दिया है। अक्टूबर की शुरुआत तक 44 प्रतिशत जरूरी दवाइयां और 54 प्रतिशत अन्य मेडिकल सामान पूरी तरह खत्म हो चुके थे।

मरीज नजात अबू अल-शेख अप्रैल 2026 से मेडिकल इवैक्युएशन (निकासी) का इंतजार कर रही हैं। फरवरी 2026 से रेडियोथेरेपी न मिल पाने के कारण उन्हें कैंसर के दोबारा उभरने का गंभीर खतरा है।

इन मुश्किलों के बीच 22 अक्टूबर 2026 को फिलिस्तीन रेड क्रिसेंट सोसाइटी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के समन्वय से रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग के जरिए 32 मरीजों और 46 साथियों को बाहर निकाला गया।

यूनिसेफ ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के इस पतन की वजह से सर्वाइवर्स की रिकवरी नहीं हो पा रही है। अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद से 351 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के फंड में कटौती के कारण 5 लाख लोगों की सहायता कम कर दी गई है, जिससे लोगों की सेहत और क्षमता और कमजोर हुई है।

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