Gaza Winter Alert: गाजा में मंडरा रहा बड़ा खतरा, सर्दियों के मौसम में कभी भी गिर सकती हैं कमजोर इमारतें.

गाजा में चल रहे भीषण युद्ध के बीच अब एक नया और बड़ा संकट सामने खड़ा हो गया है। आने वाले सर्दियों के दिनों को देखते हुए प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि जंग में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई इमारतें कभी भी ढह सकती हैं। फलस्तीनी सिविल डिफेंस के प्रवक्ता Mahmoud Basal ने पिछले महीने 19 सितंबर 2026 को एक बहुत जरूरी चेतावनी जारी की थी। इस चेतावनी में बताया गया था कि युद्ध के दौरान जिन इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा था, वे आने वाले कड़ाके के ठंड और खराब मौसम के बीच बहुत ज्यादा खतरे में हैं और कभी भी जमींदोज हो सकती हैं।
गाजा सिटी में हो चुका है बड़ा हादसा
यह चेतावनी यूं ही नहीं दी गई है, क्योंकि इससे कुछ दिन पहले ही गाजा सिटी में एक बहुत बड़ा हादसा हो चुका है। गत 16 सितंबर 2026 को गाजा सिटी में एक इमारत अचानक भरभरा कर गिर पड़ी थी, जिसमें बच्चों समेत कम से कम 20 से 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस भयानक हादसे के बाद कई लोग मलबे के नीचे दब गए थे, जिन्हें निकालने के लिए बचाव कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। उस समय राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा यह थी कि मजदूरों और बचाव टीम के पास भारी मशीनें मौजूद नहीं थीं, जिससे वे समय पर लोगों को बचा नहीं सके।
हजारों लोग रहने को मजबूर हैं खतरनाक इमारतों में
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस संकट का दायरा बहुत बड़ा है और स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। प्रवक्ता Mahmoud Basal ने पहले यह भी बताया था कि लगभग 2,000 क्षतिग्रस्त इमारतें ऐसी हैं जिनमें आज भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। इन सभी मकानों की हालत इतनी खराब है कि ये रहने लायक नहीं बचे हैं। इनमें से करीब 400 इमारतें ऐसी हैं जो कभी भी किसी भी वक्त गिर सकती हैं। इसके अलावा, फलस्तीनी लोक निर्माण मंत्रालय ने भी 18 सितंबर 2026 को इन रिपोर्टों की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पास मौजूद डेटा के अनुसार 2,000 से अधिक अन्य संरचनाएं भी बेहद खतरनाक स्थिति में हैं। गाजा सिटी के सिविल डिफेंस सर्विस के डायरेक्टर Raed Al-Dahshan ने वहां के स्थानीय लोगों से लगातार अपील की है कि वे इन टूटे-फूटे और कमजोर मकानों को तुरंत खाली कर दें और इनके आसपास भी जाने से बचें।
अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता
संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी UNRWA के अनुसार, गाजा की लगभग 82 प्रतिशत इमारतें युद्ध की वजह से किसी न किसी रूप में क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो यह संख्या करीब 200,000 इमारतों तक पहुंचती है, जिसमें से दो-तिहाई हिस्से को पूरी तरह से तबाह बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम UNDP के गाजा कार्यालय के प्रमुख Alessandro Mrakic ने भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर इस बात पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सर्दियों के दिनों में होने वाली बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ के पानी के कारण ये कमजोर इमारतें और अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे कभी भी बड़ा नुकसान हो सकता है। इस पूरे युद्ध के दौरान इतना मलबा इकट्ठा हुआ है जिसका अनुमान करीब 61 मिलियन टन लगाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस सारे मलबे को पूरी तरह साफ करने में कम से कम सात साल का लंबा समय लग सकता है।
मदद और पुनर्निर्माण के कार्य अटके
इन तमाम गंभीर खतरों के बावजूद जमीनी स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण के काम पूरी तरह से ठप पड़े हैं। नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल जैसे कई बड़े सहायता समूहों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि गाजा में जल्द से जल्द जरूरी पुनर्निर्माण सामग्री और भारी मशीनों को अंदर जाने की अनुमति दी जाए। हालांकि, दूसरी तरफ इजरायली अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अभी भी कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। उनका मानना है कि इन निर्माण सामग्रियों का गलत इस्तेमाल करके मिलिटेंट्स द्वारा इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि वैकल्पिक आवास की भारी कमी और सुरक्षित घरों के महंगे होने के कारण आज भी हजारों फलस्तीनी परिवार इन टूटी-फूटी और जानलेवा इमारतों में रहने के लिए मजबूर हैं।