गाजा युद्ध विराम का एक साल: कागजों पर शांति, जमीन पर इजरायली नियंत्रण और तबाही

Gautam Sahu10 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा युद्ध विराम का एक साल: कागजों पर शांति, जमीन पर इजरायली नियंत्रण और तबाही

अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार 'गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना' को लागू हुए एक साल बीत चुका है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी खौफनाक हैं। 10 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक तौर पर प्रभावी हुए इस युद्ध विराम के बावजूद, मानवीय संगठनों और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों का कहना है कि यह शांति केवल नाम की है। गाजा के लोग आज भी इजरायल की सख्त पाबंदियों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों ने एक दिल दहला देने वाली सच्चाई सामने रखी है। मई 2024 में रफाह क्रॉसिंग बंद होने के बाद से अब तक करीब 2,000 मरीज केवल इसलिए दम तोड़ चुके हैं क्योंकि उन्हें इलाज के लिए बाहर नहीं भेजा गया। वर्तमान में लगभग 21,000 लोगों को तत्काल विदेशी इलाज की जरूरत है, जिनमें 5,600 बच्चे और 2,800 कैंसर रोगी शामिल हैं, लेकिन उनके लिए रास्ते बंद हैं।

इलाज और भोजन का भीषण संकट

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युद्ध विराम के बाद भी हिंसा थमी नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, शांति समझौते की शुरुआत से अब तक इजरायली बलों द्वारा 1,431 फिलिस्तीनियों की जान ली जा चुकी है और 5,026 लोग घायल हुए हैं। मानवीय स्थिति इतनी गंभीर है कि ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, गाजा की 67 प्रतिशत आबादी यानी करीब 14 लाख लोग साल 2026 के अंत तक गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और भी बदतर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि गाजा का एक भी अस्पताल पूरी तरह चालू नहीं है। ईंधन, दवाओं और एम्बुलेंस जैसे जरूरी उपकरणों की भारी कमी है। वहीं, एम्स डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) ने आरोप लगाया है कि इजरायल जानबूझकर इंजन ऑयल और स्पेयर पार्ट्स पर प्रतिबंध लगाकर अस्पतालों और पानी के पंपों के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रहा है।

सैन्य नियंत्रण की बात करें तो इजरायली सेना अभी भी गाजा पट्टी के लगभग 58.9 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखे हुए है, जिससे आम नागरिकों की पहुंच जमीन के 65 प्रतिशत हिस्से तक प्रतिबंधित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर दुख जताते हुए कहा कि हालांकि युद्ध विराम से कुछ राहत मिली, लेकिन यह न तो सुरक्षा दे पाया और न ही पुनर्निर्माण का कोई विश्वसनीय रास्ता दिखा पाया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल सहित 100 से अधिक मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर इस हिंसा और निर्माण सामग्री की नाकेबंदी की कड़ी निंदा की है। गाजा के लोग आज भी एक ऐसे भविष्य की तलाश में हैं जहां उन्हें केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में शांति मिल सके।

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