गाज़ा में युद्धविराम के एक साल बाद भी संकट गहरा, पुनर्निर्माण ठप

गाज़ा पट्टी: शर्म अल-शेख में हुए युद्धविराम समझौते को एक साल हो चुका है, लेकिन ज़मीन पर हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते दिख रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई और मानवीय रुकावटें अब भी जारी हैं, और युद्धविराम काफ़ी हद तक बेअसर साबित हुआ है।
गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ युद्धविराम शुरू होने के बाद अब तक 1,471 फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 5,189 घायल हुए हैं। 10 अक्टूबर को इज़राइली हमलों में पांच और लोगों की मौत हुई, जिनमें चार पांडा मॉल के पास और एक तुफ़ाह इलाक़े में मारे गए। इससे एक दिन पहले भी एक बच्चे समेत चार लोगों की जान गई थी। युद्धविराम के बाद मरने वालों में कम से कम 327 बच्चे शामिल हैं।
राहत और पुनर्निर्माण पर सवाल
मानवीय स्थिति को लेकर सबसे बड़ी चिंता आश्रय की है। सर्दियां क़रीब आने के साथ लगभग दो मिलियन लोगों को तत्काल छत की ज़रूरत है। इज़राइली सेना पर राफ़ा, खान यूनिस और अल-मवासी में तंबू बस्तियों को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाले "बोर्ड ऑफ़ पीस" और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 ने बुनियादी ढांचे की बहाली का वादा किया था। सितंबर 2026 में पेश हुए "6-महीने के गाज़ा रिकवरी प्रोग्राम" पर भी अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। फंडिंग और पहुंच की दिक्कतें इसकी बड़ी वजह बताई जा रही हैं।
अनुमान है कि अगले दस सालों में पुनर्निर्माण पर 71.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा। नवंबर 2025 से अब तक मलबे से 630 से ज़्यादा शव निकाले जा चुके हैं, जबकि अनुमानतः 8,000 लोग अब भी मलबे में दबे हैं। आईओएम समेत सौ से ज़्यादा मानवीय संगठनों ने दवाइयों, ईंधन और निर्माण सामग्री पर लगी पाबंदियों की कड़ी आलोचना की है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी तस्वीर धुंधली है। हमास ने उच्च प्रतिनिधि निकोलाय म्लादेनोव की ओर से पेश 15-सूत्री निरस्त्रीकरण योजना पर सहमति जताई है, लेकिन इसके लिए इज़राइली वापसी की शर्त रखी है। इज़राइल पहले पूर्ण निरस