गाजा युद्धविराम का उल्लंघन: 5,000 से ज्यादा बार टूटे नियम, हजारों की जान गई

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा युद्धविराम का उल्लंघन: 5,000 से ज्यादा बार टूटे नियम, हजारों की जान गई

गाजा में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है। अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता में 10 अक्टूबर 2025 को जिस युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, उसका जमीन पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के बाद से अब तक 5,355 बार इजरायली सेना द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि कागजों पर शांति होने के बावजूद हकीकत में युद्ध जारी है।

दस्तावेजों के अनुसार, इन उल्लंघनों में 2,303 बमबारी, 2,238 गोलीबारी की घटनाएं और 215 सैन्य घुसपैठ शामिल हैं। इतना ही नहीं, करीब 500 घरों को ध्वस्त किया गया और 99 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अल जजीरा के एक विश्लेषण ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि समझौते के बाद के 361 दिनों में से 325 दिनों तक हमले जारी रहे। यानी पूरे साल में केवल 36 दिन ऐसे थे, जब किसी की मौत, चोट या हमले की खबर नहीं आई।

मानवीय संकट और भारी तबाही

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इस अवधि के दौरान हुई मौतों का आंकड़ा दिल दहला देने वाला है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम शुरू होने के बाद से कम से कम 1,400 से 1,471 फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है, जिनमें 327 बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 5,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालिया घटनाओं की बात करें तो 9 अक्टूबर 2026 को भी इजरायली हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई और दो बच्चों सहित छह लोग घायल हुए। इससे पहले अगस्त 2026 में गाजा सिटी के एक कैफे पर हुए हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी।

मानवाधिकार संगठनों के एक गठबंधन का कहना है कि यह युद्धविराम अब सिर्फ नाम का रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने गाजा पर अपना नियंत्रण 53% से बढ़ाकर 63% कर लिया है। साथ ही, मानवीय सहायता को रोकने के गंभीर आरोप लगे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि तय किए गए सहायता ट्रकों में से केवल 34.4% ही गाजा में दाखिल हो पाए और ईंधन की आपूर्ति प्रतिबद्धताओं के मुकाबले मात्र 15.5% रही।

हालांकि इस समझौते का मकसद बंधकों की रिहाई, हमास का निशस्त्रीकरण और गाजा का पुनर्निर्माण करना था, लेकिन हालात इसके उलट हैं। संयुक्त राष्ट्र आयोग ने अपनी जांच में इजरायल पर नरसंहार के आरोप लगाए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और कई अन्य संस्थाओं ने इस मानवीय संकट को रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा और सीधी फंडिंग की अपील की है।

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