गाजा: युद्ध के तनाव ने 12 साल की बच्ची को बनाया 'बूढ़ा', त्वचा और बालों ने बदला रंग

Gautam Sahu8 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा: युद्ध के तनाव ने 12 साल की बच्ची को बनाया 'बूढ़ा', त्वचा और बालों ने बदला रंग

गाजा के एक विस्थापन शिविर में रहने वाली 12 साल की लाना अल-शरीफ की कहानी दिल दहला देने वाली है। युद्ध की विभीषिका और मानसिक तनाव ने इस मासूम बच्ची को एक ऐसी बीमारी की गिरफ्त में धकेल दिया है, जिसने उसकी पूरी पहचान बदल दी। लाना 'विटिलिगो' (Vitiligo) नामक एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर से जूझ रही है, जिसके कारण उसकी त्वचा का रंग उड़ गया है और उसके बाल समय से पहले सफेद यानी ग्रे हो गए हैं।

यह दुखद स्थिति तब शुरू हुई जब जनवरी 2024 में उसके पड़ोस में एक भीषण हवाई हमला हुआ। उस हमले के दौरान लाना को इतना गहरा सदमा और पैनिक अटैक लगा कि उसका शरीर इस तनाव को झेल नहीं पाया और उसे यह गंभीर बीमारी हो गई। शिविर में लोग उसे अब 'बुजुर्ग बच्ची' कहकर बुलाते हैं। अपनी मासूमियत और दर्द को बयां करते हुए लाना कहती है, "मैं चाहती हूं कि सब कुछ पहले जैसा हो जाए, ताकि दूसरे बच्चे फिर से मेरे साथ खेल सकें।"

इलाज की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं का संकट

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लाना के पिता खलील अल-शरीफ का कहना है कि उनकी बेटी की हालत लगातार बिगड़ रही है क्योंकि उसे सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, लाना को विशेष लेजर थेरेपी की जरूरत है, लेकिन गाजा में यूवी लाइट (UV light) के उपकरण युद्ध के दौरान नष्ट हो चुके हैं। वर्तमान में गाजा का स्वास्थ्य मंत्रालय केवल हृदय और कैंसर के गंभीर मरीजों को ही विदेश भेजने को प्राथमिकता दे रहा है, जिसकी वजह से लाना जैसे बच्चे इलाज के बिना तड़पने को मजबूर हैं।

यह केवल एक बच्ची की कहानी नहीं है, बल्कि गाजा के हजारों बच्चों की त्रासदी है। अल-शिफा मेडिकल कॉम्प्लेक्स के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सल्मिया के अनुसार, लगभग 12,000 से 14,000 गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजने की जरूरत है। यूनिसेफ (UNICEF) का अनुमान है कि जून 2024 तक गाजा के करीब 12 लाख बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता की तत्काल आवश्यकता है।

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में श्वसन संक्रमण और कुपोषण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय आयोग की एक रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि गाजा में इस समय दुनिया के सबसे अधिक संख्या में 'बाल अपंग' (child amputees) मौजूद हैं, जो इस युद्ध की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करता है।

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