गाजा में युद्धविराम के बाद इजरायली हमलों में 340 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई और लाखों बेघर हैं

जेनेवा: यूनिसेफ के मुताबिक गाजा में अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम के बाद से अब तक इजरायली हमलों में 340 से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है। एजेंसी के प्रवक्ता रिकार्डो पाइरेस ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में बताया कि लगातार हो रही ये मौतें दर्शाती हैं कि युद्धविराम का समझौता इस क्षेत्र के बच्चों को बचाने में नाकाम रहा है।
पाइरेस ने जानकारी दी कि पिछले दो हफ्तों के आंकड़ों के अनुसार हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और गोलीबारी में सात बच्चों की मौत हुई है, जिनमें पांच लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा कम से कम 33 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दो अन्य लड़कों की मौत उन चोटों की वजह से हुई जो उन्हें इस अवधि से पहले लगी थीं।
गाजा में हालात बेहद खराब हैं और करीब 8 लाख बच्चे विस्थापित हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे टेंटों या ऐसी इमारतों में रह रहे हैं जो क्षतिग्रस्त और असुरक्षित हैं। युद्ध की शुरुआत से लेकर युद्धविराम के बाद तक के समय में अनुमानित 60 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया है।
यूनिसेफ ने कहा है कि गाजा के लगभग हर बच्चे को मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है। सर्दियों के करीब आने के साथ मानवीय स्थिति और बिगड़ रही है। यह लगातार चौथा साल है जब यहां के बच्चे रहने लायक परिस्थितियों के अभाव में जीवन बिता रहे हैं।
इन मुश्किलों के बीच शिक्षा की कोशिशें जारी हैं और 5 लाख 60 हजार से ज्यादा बच्चे दोबारा पढ़ाई शुरू कर चुके हैं। इनमें 200 से अधिक यूनिसेफ समर्थित लर्निंग सेंटर शामिल हैं। हालांकि, फंड की कमी के कारण पट्टी में कई जरूरी सेवाएं अब भी बंद पड़ी हैं।
बता दें कि 10 अक्टूबर 2025 को घोषित युद्धविराम समझौते में शत्रुता खत्म करने, कब्जे वाली सेनाओं की वापसी, मानवीय सहायता पहुंचाने और कैदियों की अदला-बदली के प्रावधान थे। नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस योजना का समर्थन किया था, लेकिन यूनिसेफ का कहना है कि जारी हिंसा से फिलिस्तीनी युवाओं की जान अब भी खतरे में है।