टैक्स विवाद के चलते गाजा में व्यापारियों ने रोका सामान का आयात जिससे ताजी सब्जियों और कपड़ों की किल्लत बढ़ सकती है

गाजा: गाजा पट्टी में स्थानीय व्यापारियों और हमास के बीच टैक्स को लेकर छिड़े विवाद के कारण पिछले दो दिनों से व्यापारिक सामान का आयात पूरी तरह रुक गया है। 16 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी के मुताबिक इस रोक की वजह से ताजी सब्जियां, मांस और सर्दियों के कपड़े गाजा के अंदर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
क्षेत्र में पहले से ही खाद्य असुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है, ऐसे में सामान की कमी से कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका है। गाजा की करीब 21 से 22 लाख की आबादी इस समय भारी मुश्किलों का सामना कर रही है, जहां जरूरी चीजों की कीमतें युद्ध से पहले के मुकाबले आठ से दस गुना तक बढ़ चुकी हैं।
इजरायली सैन्य इकाई COGAT ने बताया कि आयात रोकने की पहल उनकी तरफ से नहीं की गई है। उनके मुताबिक स्थानीय व्यापारियों ने हमास की मांगों के कारण आयात का समन्वय बंद कर दिया है। COGAT का दावा है कि हमास व्यापारियों पर हर ट्रक के लिए 10,000 न्यू इजरायली शेकेल (लगभग 3,220 से 3,226 डॉलर) का शुल्क देने का दबाव बना रहा है और साथ ही 30 प्रतिशत बिक्री नकद में करने का आदेश दिया है।
खबरों के मुताबिक हमास के सुरक्षाकर्मियों ने एक ऐसे व्यापारी के बेटे को गिरफ्तार कर लिया जिसने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था। इस घटना के बाद अन्य व्यापारियों ने डर के मारे अपना कामकाज रोक दिया। हालांकि, हमास के अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि 10,000 शेकेल का शुल्क विधवाओं और अनाथों की मदद के लिए एक स्वैच्छिक सामुदायिक पहल है और नकद भुगतान की मांग तरलता बढ़ाने के लिए की गई है।
COGAT ने कहा कि इस रुकावट से रोजाना आने वाले ट्रकों की संख्या घटकर लगभग 300 रह सकती है। वहीं गाजा के प्राइवेट ट्रकर्स यूनियन के प्रमुख नाहेद शेहीबर ने इजरायली दावों को गलत बताते हुए इस रुकावट के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
गाजा की रिकवरी की देखरेख कर रहे निकोले म्लादेनोव ने व्यापारियों को डराने-धमकाने और सप्लाई चेन में दखल देने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि नागरिक आपूर्ति को इस तरह के शोषण से बचाकर रखना चाहिए। इस बीच व्यापारिक आयात तो रुका हुआ है, लेकिन मानवीय सहायता के शिपमेंट अलग तरीके से गाजा में पहुंच रहे हैं।