गाजा युद्ध का असर इसराइल की सेहत पर पड़ा भारी, दूषित पानी और मलबे से बढ़ रहा है खतरा.

Praggya Singh sabal30 August 20262 min read16 viewsWorld
गाजा युद्ध का असर इसराइल की सेहत पर पड़ा भारी, दूषित पानी और मलबे से बढ़ रहा है खतरा.

गाजा संघर्ष के कारण पैदा होने वाले पर्यावरणीय संकट ने अब सीधे तौर पर इसराइल के लोगों की सार्वजनिक सेहत को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। गैलील फाउंडेशन की पूर्व प्रबंधक और जैविक विज्ञान की पूर्व शिक्षिका Dianne Woodward ने 30 अगस्त 2026 को प्रकाशित अपने अल जजीरा के एक लेख में इस बात का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार इसराइली अधिकारी लगातार उस पर्यावरणीय असर से निपटने की कोशिश कर रहे हैं जो इस युद्ध की वजह से साझा भूमध्यसागरीय पारिस्थितिकी तंत्र में फैल रहा है।

दूषित पानी और सीवेज से बढ़ रहा है बड़ा संकट

गाजा में स्वच्छता और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे के पूरी तरह तबाह हो जाने के कारण हर दिन 1 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सीधे समुद्र में छोड़ा जा रहा है। भूमध्य सागर की लहरें इस गंदे पानी को उत्तर दिशा की ओर इसराइली तटों की तरफ बहाकर ले जा रही हैं। इस वजह से Ashkelon desalination plant में पानी के अंदर मल से जुड़े बैक्टीरिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है, जिसके चलते इस प्लांट को बार-बार बंद करना पड़ रहा है। इन दूषित तत्वों की वजह से जहरीले शैवाल यानी एल्गी ब्लूम भी पैदा हो रहे हैं जो समुद्री जीवों के लिए खतरनाक साबित होने के साथ-साथ पानी साफ करने वाले फिल्टर सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.

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गाजा का मलबा और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

गाजा संघर्ष के दौरान लगभग 6 करोड़ टन मलबा पैदा हुआ है और इसराइल ने इस मलबे के एक बड़े हिस्से को अपने देश और वेस्ट बैंक के कचरा ठिकानों पर ले जाना शुरू कर दिया है। Euro-Med Monitor की रिपोर्ट के मुताबिक इसराइली ट्रक रोजाना करीब 100 फेरे लगाकर इस मलबे को ढो रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस मलबे के अंदर एस्बेस्टस, सीसा, पारा, कैडमियम जैसी भारी धातुएं, औद्योगिक रसायन और खतरनाक जैविक कीटाणु मौजूद हैं। साल 2008 के बाद से गाजा में हुए सभी पिछले संघर्षों के मुकाबले यह मलबे की मात्रा करीब 20 गुना ज्यादा है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम और संयुक्त कार्य समूह

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और 'बोर्ड ऑफ पेरिस' के प्रतिनिधियों ने स्वच्छता और सार्वजनिक सेहत से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। इस बात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई थी PMO Statement। यह समूह गाजा के डिसीधे से जुड़े मुद्दों पर भी बात करेगा। इकोपीस और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम जैसे कई पर्यावरण संगठनों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि गाजा में मानवीय और पर्यावरणीय स्थिति बहुत खराब हो चुकी है, जहां साल 2026 की शुरुआत तक 97% पानी के सैंपल विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर खरे नहीं उतरे थे और यह सीधे तौर पर इसराइल की क्षेत्रीय पारिस्थितिकी और सेहत के लिए एक बड़ा खतरा है।

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