गाज़ा संघर्ष में मौत का आंकड़ा 73,662 पहुंचा, महिलाओं और बच्चों की स्थिति हुई बेहद खराब.

Nura Basta9 September 20263 min read27 viewsWorld
गाज़ा संघर्ष में मौत का आंकड़ा 73,662 पहुंचा, महिलाओं और बच्चों की स्थिति हुई बेहद खराब.

गाज़ा में चल रहे लंबे संघर्ष के बीच फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक डरावना और बड़ा आंकड़ा सामने रखा है। 8 सितंबर 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में मरने वाले फिलिस्तीनियों की कुल संख्या बढ़कर 73,662 हो गई है, जबकि इस दौरान 174,627 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह पूरा संघर्ष 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था और आज भी रोज़ाना होने वाली एयरस्ट्राइक, गोलाबारी और गोलीबारी की वजह से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आम लोगों का जीवन पूरी तरह तबाह हो चुका है और हर दिन किसी न किसी परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट रहा है।

अस्पतालों में लगातार पहुंच रहे हैं पीड़ित और शव

गाज़ा के अस्पतालों से मिल रही ताजा जानकारी के मुताबिक, 7 सितंबर से 8 सितंबर 2026 के बीच अलग-अलग अस्पतालों में चार शव और पांच घायल लोग लाए गए। इसके अलावा, उससे पिछले 24 घंटों के दौरान कम से कम पांच फिलिस्तीनी मारे गए थे, 30 लोग जख्मी हुए थे और पुराने जख्मों की वजह से दो लोगों की मौत हो गई थी। यहां यह बताना जरूरी है कि 10 अक्टूबर 2025 को जब एक संघर्ष विराम लागू हुआ था, तब से लेकर अब तक 1,355 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 4,516 लोग घायल हुए हैं। लगातार जारी हमलों की वजह से राहत और बचाव दलों का काम भी बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है।

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मलबे में दबे हैं कई लोग और बढ़ रही है महिलाओं की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बहुत से पीड़ित अभी भी इमारतों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जहां तक एंबुलेंस और इमरजेंसी वर्कर पहुंच नहीं पा रहे हैं। इस भयानक लड़ाई का आम जनता के शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ा है। अब तक लगभग 5,000 लोगों के अंग काटने (amputations) पड़े हैं और करीब 10,000 ऐसे मरीज हैं जिन्हें लंबे समय तक खास मेडिकल देखभाल और रिहैबिलिटेशन की जरूरत है। इसके अलावा, सितंबर 2026 में UN Women की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसका शीर्षक 'Invisible No More: Brief No. 1 — Left to Carry Households Alone' है। इस रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा में अब महिलाएं लगभग 86,290 परिवारों को अकेले चला रही हैं, जो कि वहां का हर चौथा परिवार यानी 1 में से 4 घर है। 18 से 59 वर्ष की आयु के पुरुषों और लड़कों की मौत का आंकड़ा बहुत ज्यादा होने की वजह से महिलाओं पर घर चलाने का यह बोझ दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (OCHA) की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय कानून

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने 8 सितंबर 2026 को यह रिपोर्ट दी कि लगातार जारी हमलों में बच्चों समेत आम नागरिक अपनी जान गंवा रहे हैं। OCHA ने इस बात पर फिर से जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत आम नागरिकों और स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना हर हाल में जरूरी है। लेकिन मैदानी हालात को देखते हुए यह साफ है कि आम जनता को इस भीषण संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनके सामने जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

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