गाजा में संघर्ष जारी, मौत का आंकड़ा पहुंचा 74 हजार के करीब, युद्धविराम के बावजूद हमले जारी

गाजा पट्टी में हालात दिन-प्रतिदिन बहुत ज्यादा खराब होते जा रहे हैं और चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार वहां पर मरने वालों की संख्या अब लगभग 74,000 तक पहुंच गई है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, उनके मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 को जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है, तब से लेकर 19 सितंबर 2026 तक कुल 73,910 फलस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा इस संघर्ष में अब तक कुल 174,914 लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया था। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि आम जनता को इस हिंसा में कितना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है और स्थिति कितनी गंभीर बनी हुई है।
बच्चों की मौत का बड़ा आंकड़ा और युद्धविराम का असर
स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, जब 7 अक्टूबर 2023 से लेकर 7 मई 2026 तक का समय देखा गया, तो उसमें यह बात सामने आई कि इस दौरान मरने वालों में बच्चों की संख्या 21,638 थी। यह आंकड़ा उस अवधि के दौरान कुल मौतों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बनता है, जो कि बहुत ही डराने वाली बात है। अमेरिका की मध्यस्थता से एक युद्धविराम समझौता भी कराया गया था जो अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था ताकि लोगों को राहत मिल सके। लेकिन इसके बाद भी लगातार जारी हिंसा और हमलों के कारण कम से कम 1,390 और फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई और 4,801 लोग घायल हो गए। समझौते के बाद भी शांति न मिलने से आम लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और वे लगातार खतरे के साये में जीने को मजबूर हैं।
हालिया हमले और अस्पतालों के आंकड़े
हाल ही में 19 सितंबर को खत्म हुए 48 घंटे के समय के दौरान अस्पतालों में कुल 4 लोगों की मौत और 17 लोगों के घायल होने की पुष्टि दर्ज की गई। इसी दिन यानी 19 सितंबर को इजरायली सैन्य गतिविधि के तहत जबालिया शरणार्थी शिविर के पश्चिम में एक बड़ा हमला किया गया। इस हमले में गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के डायरेक्टर-जनरल मुनीर अल-बुरश के बेटे बासिर अल-बुरश की मौत हो गई। इसके अलावा शुजैया इलाके में एक ड्रोन हमला हुआ, नुसीरात शरणार्थी शिविर के उत्तर में पुरानी चोटों के कारण एक छोटी बच्ची की मौत हो गई, और खान यूनिस के दक्षिण-पश्चिम में अल-शकोश क्षेत्र तथा जबालिया शिविर के पूर्व में इजरायली सैन्य वाहनों द्वारा रुक-रुक कर गोलीबारी और ड्रोन बमबारी की गई। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ओचा ने नागरिकों के खिलाफ लगातार हो रही इस हिंसा और आक्रामकता को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई है।