गाजा युद्ध के 3 साल: पहचान खो बैठा शहर, मलबे के ढेर में तब्दील हुए घर और मस्जिदें

Gautam Sahu8 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा युद्ध के 3 साल: पहचान खो बैठा शहर, मलबे के ढेर में तब्दील हुए घर और मस्जिदें

कल्पना कीजिए कि जिस शहर में आप पले-बढ़े, जिसकी गलियां, मस्जिदें और बाजार आपको याद थे, वह अचानक पूरी तरह गायब हो जाए। गाजा के निवासियों के लिए यह कोई डरावना सपना नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत है। अक्टूबर 2023 में शुरू हुए हमलों के बाद पिछले तीन सालों से जारी इस भीषण युद्ध ने गाजा को एक ऐसी जगह बना दिया है जिसे अब पहचानना नामुमकिन है। लोग अपने ही शहर में अजनबी बन चुके हैं क्योंकि उनके आस-पास की हर जानी-पहचानी इमारत अब मलबे का ढेर है।

संयुक्त राष्ट्र सैटेलाइट सेंटर (UNOSAT) के ताजा आंकड़े इस तबाही की भयावहता को बयां करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा की लगभग 82% इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और दो-तिहाई बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया है। शहर में अब 6.8 करोड़ टन से ज्यादा मलबा जमा है। सबसे ज्यादा दुखद यह है कि आस्था के केंद्रों पर भी इस युद्ध का गहरा असर पड़ा है; गाजा की 1,275 मस्जिदों में से 1,076 को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त

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इस युद्ध ने न केवल इमारतों को, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी लील लिया है। शिक्षा क्षेत्र में जो नुकसान हुआ है, वह अभूतपूर्व है। अब तक 19,189 स्कूली छात्रों और 1,386 यूनिवर्सिटी छात्रों की जान जा चुकी है, जबकि 122 स्कूल और यूनिवर्सिटीज जमींदोज हो चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और भी बदतर है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 74,000 के पार पहुंच गई है और 1.74 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो 90% ऊर्जा बुनियादी ढांचा और 88% जल एवं स्वच्छता प्रणालियां नष्ट हो चुकी हैं। वर्तमान में करीब 19 लाख लोग अपने ही घर से बेघर होकर आंतरिक रूप से विस्थापित हैं, जिनमें से 94% को तत्काल आश्रय की सख्त जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अकल्पनीय पीड़ा को समाप्त करने और स्थायी युद्धविराम की अपील की है। दूसरी ओर, इजरायली सेना (IDF) का कहना है कि वे अब भी हमास के सैन्य ढांचे को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तबाही से उबरने और खतरनाक मलबे व बिना फटे बमों को हटाने में अगले एक दशक तक करीब 71.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा।

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