गाजा में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, 7 लाख छात्रों का भविष्य अधर में

गाजा में पिछले तीन वर्षों से जारी भीषण संघर्ष ने वहां की शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह तबाह कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि लगभग 7 लाख छात्र औपचारिक शिक्षा से वंचित हो गए हैं। इनमें से अधिकांश बच्चों ने लगातार तीन शैक्षणिक वर्ष गंवा दिए हैं, जिससे उनकी पूरी पीढ़ी के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों के मुताबिक, वहां के 93% स्कूल भवनों को पूरी तरह से फिर से बनाने की जरूरत है।
इस तबाही की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूनिसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 98% स्कूल इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 81% पर सीधे हमले हुए हैं। शिक्षा के इस मलबे के बीच, फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय ने एक हृदयविदारक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 22,000 से अधिक छात्रों और शिक्षा कर्मियों की जान जा चुकी है। बुनियादी ढांचे की बात करें तो 179 सरकारी स्कूल, 105 UNRWA स्कूल और 63 विश्वविद्यालय भवन पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।
अस्थाई इंतजाम और चुनौतियों का अंबार
पढ़ाई को किसी तरह जारी रखने के लिए अधिकारियों ने 700 अस्थाई शिक्षण केंद्र और 12 वर्चुअल स्कूल शुरू किए हैं। हालांकि, जमीन पर चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। यूनिसेफ ने अपने शिक्षा कार्यक्रमों के लिए 86 मिलियन डॉलर की मांग की है, ताकि 2026 के अंत तक 336,000 बच्चों को दोबारा कक्षाओं में लाया जा सके।
दूसरी ओर, मानवीय सहायता में आने वाली बाधाएं इस संकट को और बढ़ा रही हैं। हालांकि 10 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम प्रभावी हुआ था, लेकिन लगातार हो रहे उल्लंघनों ने राहत कार्यों को मुश्किल बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र राहत प्रमुख टॉम फ्लेचर ने सभी पक्षों से युद्धविराम समझौते का सम्मान करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
सिर्फ इमारतें ही नहीं टूटी हैं, बल्कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 'अनेरा' (Anera) की एक रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों का मानसिक ट्रॉमा और शिक्षकों की अस्थिरता इस संकट को और गहरा कर रही है। UNRWA ने 19 सितंबर 2026 को नया शैक्षणिक वर्ष शुरू करने की कोशिश तो की, लेकिन गाजा मीडिया ऑफिस के मुताबिक, कई स्कूलों का इस्तेमाल अब भी शरणस्थलों के रूप में किया जा रहा है, जिससे बच्चे लगातार चौथे साल भी अपनी कक्षाओं से दूर हैं।