Gaza में बड़ा खतरा, सरकार ने 255 इमारतों को गिराने का किया इमरजेंसी प्लान तैयार।

गाजा में युद्ध के कारण बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई इमारतों के गिरने से हो रहे हादसों को रोकने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। गजा गवर्नमेंट मीडिया ऑफिस ने पब्लिक वर्क्स एंड हाउसिंग मिनिस्ट्री और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर रविवार, 20 सितंबर 2026 को एक आपातकालीन योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत कुल 255 खतरनाक इमारतों को गिराया जाएगा ताकि आम नागरिकों की जान बचाई जा सके और किसी भी तरह के बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सके।
गाजा में दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासन हुआ सख्त
यह फैसला हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद लिया गया है। बुधवार, 16 सितंबर 2026 को गाजा सिटी में अल-साआदा इमारत अचानक ढह गई थी, जिसके मलबे में दबकर 21 विस्थापित फिलिस्तीनी लोगों की मौत हो गई थी। इस भयानक हादसे में जान गंवाने वालों में 12 छोटे बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा, शुक्रवार को गाजा सिटी में बारिश के कारण एक छत के गिरने से 4 बच्चों को हल्की चोटें आईं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध में क्षतिग्रस्त हुई इमारतों के गिरने से अब तक कुल 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद से ही लगातार चेतावनी दी जा रही थी।
खतरनाक इमारतों की पहचान और प्रशासन की कार्रवाई
पब्लिक वर्क्स एंड हाउसिंग मिनिस्ट्री ने पूरे इलाके में ऐसी लगभग 3,000 इमारतों की पहचान की है जिन्हें फिलहाल रहने के लिए बेहद खतरनाक माना गया है। स्थानीय अधिकारियों को तुरंत जमीनी स्तर पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों के तहत सबसे पहले खतरनाक ढांचों के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। साथ ही विशेष सरकारी समितियों के साथ मिलकर उन परिवारों की पहचान की जा रही है जो अब भी जान जोखिम में डालकर इन टूटी-फूटी इमारतों में रह रहे हैं और उन्हें सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने का काम किया जा रहा है।
राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में आ रही है भारी रुकावट
गवर्नमेंट मीडिया ऑफिस ने जानकारी दी है कि इन इमारतों को गिराने और इलाके के पुनर्निर्माण के काम में कई बड़ी मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन के पास फंड की भारी कमी है और भारी मशीनों का भी बहुत अभाव है। इसके अलावा लंबे समय से चले आ रहे इजरायली नाकेबंदी के कारण जरूरी निर्माण सामग्री और शेल्टर का सामान गाजा के अंदर नहीं पहुंच पा रहा है। फिलिस्तीनी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कई बार अपील की है कि राहत सामग्री और निर्माण सामान को अंदर आने की अनुमति दी जाए, लेकिन इस पर अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। विस्थापित लोगों के लिए रहने की जगह और जमीन की कमी आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।