गाजा में सहायता की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, मेडिकल स्टाफ पर मानसिक संकट
गाजा में युद्ध के तीन साल बाद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। डॉक्टरों और नर्सों ने अपनों को खोया है और वे मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।

गाजा: युद्ध के तीन साल बाद भी यहां की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। मेडिकल प्रोफेशनल बेहद विनाशकारी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। एक साल से अधिक समय से युद्धविराम लागू होने के बावजूद स्वास्थ्य ढांचा लगभग निष्क्रिय हो चुका है।
क्षेत्र के कुल 57 अस्पतालों और फील्ड अस्पतालों में से केवल 35 ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। कोई भी अस्पताल अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। केरेम शालोम जैसे क्रॉसिंग पर सहायता प्रतिबंधों की वजह से जरूरी दवाओं, ईंधन और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है।
मेडिकल स्टाफ पर इस संकट का गहरा मानवीय असर पड़ा है। एक अध्ययन के अनुसार, कम से कम 78 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों के पास मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच नहीं है। सर्वे में शामिल 41 प्रतिशत कर्मियों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोने की बात कही है।
वहीं 46 प्रतिशत कर्मियों ने व्यक्तिगत शोक और अपने कार्यस्थल से विस्थापन के दोहरे सदमे का सामना किया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक मुनीर अल-बुरश ने बताया कि स्टाफ जान बचाने के अपने पेशेवर कर्तव्य और अपनों को खोने के दर्द के बीच फंसा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि पर्याप्त आराम और समर्थन की कमी से मेडिकल वर्कफोर्स के भविष्य को खतरा है।
मेडिकल कर्मियों की हिरासत, चोट और हत्याओं ने स्टाफ के संकट को और गहरा कर दिया है। मेडिकल एड फॉर फिलिस्तीनियंस (MAP), इमरजेंसी और फिजिशियन फॉर ह्यूमन राइट्स (PHR) जैसे मानवीय संगठनों ने रिपोर्ट किया है कि स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है।
पिछले 24 घंटों के दौरान गाजा सिटी और खान यूनिस में हुए इजरायली हमलों में और मौतें हुई हैं। इन हमलों ने पहले से ही दबाव में काम कर रहे मेडिकल कर्मियों की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।