गाजा में युद्धविराम के नाम पर खूनखराबा, इजरायली हमलों में 1500 से ज्यादा فلسطینی ढेर
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में युद्धविराम के बावजूद इजरायली हमलों में 1500 लोग मारे गए और सहायता प्रतिबंधित है।

गाजा: गाजा पट्टी में 10 अक्टूबर 2025 को घोषित युद्धविराम महज कागजों तक सिमट कर रह गया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल लगातार इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है और लगभग हर दिन होने वाले हमलों में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के लागू होने के बाद से अब तक इजरायली सेना के हमलों में 1,400 से 1,500 فلسطینی मारे जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं और मीडिया ने इस स्थिति को देखते हुए इसे 'सिर्फ नाम का युद्धविराम' करार दिया है।
यह शांति समझौता पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 20 सूत्रीय प्रस्ताव के बाद हुआ था, जिसमें कतर, मिस्र और तुर्की ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। शर्तों के मुताबिक, शत्रुता को तुरंत रोकना था और 72 घंटों के भीतर सभी इजरायली बंधकों को 2,000 فلسطینی कैदियों के बदले रिहा करना था।
समझौते में इजरायली बलों की तीन चरणों में वापसी और मानवीय सहायता के लिए नाकाबंदी हटाने की बात कही गई थी। गाजा के शासन और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए एक 'बोर्ड ऑफ पीस' का प्रस्ताव था, लेकिन हमास के निशस्त्रीकरण जैसे अहम मुद्दे अनसुलझे रहे।
जमीनी हकीकत यह है कि इजरायली सेना ने अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है। 'येलो लाइन' की सीमा अब पश्चिम की ओर खिसक गई है, जिससे गाजा पट्टी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इजरायली नियंत्रण में आ गया है। मानवीय सहायता पर अब भी कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं और पुनर्निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है।
असाही न्यूजपेपर जैसे संपादकीय लेखों ने इस मौजूदा हिंसा को युद्धविराम का 'क्रूर मजाक' बताया है। क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ती है।
इसी बीच, 23 अक्टूबर 2026 से बढ़ी हिंसा के बाद इजरायली सेना ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के हेब्रोन में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के बाद इलाके को 'बंद सैन्य क्षेत्र' घोषित कर दिया गया है, जिससे हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।