गाज़ा में इज़रायली हमले: छह फ़िलिस्तीनी मारे गए, युद्धविराम के एक साल बाद

Gautam Sahu10 October 20262 min read0 viewsWorld
गाज़ा में इज़रायली हमले: छह फ़िलिस्तीनी मारे गए, युद्धविराम के एक साल बाद

गाज़ा पट्टी: युद्धविराम समझौते को एक साल पूरा होने के दिन ही गाज़ा के कई इलाकों में इज़रायली हमलों में फ़िलिस्तीनियों की जान गई है। अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को गाज़ा में आम लोगों के जमावड़ों को निशाना बनाकर किए गए दो अलग-अलग हवाई हमलों में पाँच लोगों की मौत हुई है। कुल मिलाकर कम से कम छह फ़िलिस्तीनियों के मारे जाने की ख़बर है।

पहला हमला गाज़ा सिटी के पश्चिमी हिस्से में हैदर चौराहे के पास हुआ, जहाँ चार लोग मारे गए और पाँच घायल हुए। दूसरे हमले में गाज़ा सिटी के पूर्वी इलाके तुफ़्फ़ाह मोहल्ले में एक व्यक्ति की जान गई। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को, IMEMC न्यूज़ की रिपोर्ट में इज़रायली सेना की कार्रवाई में चार फ़िलिस्तीनियों के मारे जाने का ज़िक्र है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।

किन लोगों की मौत हुई

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रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम आए हैं, उनमें जबालिया का 40 वर्षीय सोहैल आदिल असाफ़ शामिल है। सब्रा इलाके में बच्चे हुसाम अबू असर और महिला इंतिसार अबू असर की मौत हुई। देर अल-बलह के दक्षिण-पूर्व में मिस्बाह दल्लूल भी मारे गए। गाज़ा के अस्पतालों ने 9 अक्टूबर को ख़त्म हुए 24 घंटों में चार शवों के आने और 28 घायलों के इलाज की जानकारी दी है।

हमलों का असर सिर्फ़ जानों तक सीमित नहीं है। ज़मीन पर गोलाबारी, हवाई हमले, ड्रोन से हमले और सीधी फ़ायरिंग की ख़बरें आई हैं, और कई फ़िलिस्तीनी घरों को गिराए जाने की भी रिपोर्ट है। प्रभावित इलाकों में जबालिया, सब्रा, देर अल-बलह, अल-क़ादिसिया और हमद सिटी के आसपास के क्षेत्र, बुरैज शरणार्थी शिविर और ख़ान यूनिस व राफ़ा के मवासी इलाके शामिल हैं।

गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ 10 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक इज़रायली कार्रवाई में 1,400 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 5,189 लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का आकलन है कि इज़रायली सेना के नियंत्रण में अब गाज़ा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र ने 10 अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 की शुरुआत तक इज़रायली सैन्य तैनाती वाले इलाकों के पास 196 फ़िलिस्तीनियों की मौत की पुष्टि की थी।

युद्धविराम अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ था, जिसका मक़सद बड़े सैन्य अभियान रोकना, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता बढ़ाना था। लेकिन Human Rights Watch का कहना है कि ज़रूरी राहत सामग्री अब भी नाकाफ़ी है, कई रास्ते बंद हैं और पुनर्निर्माण का काम ठप पड़ा है। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख़ यह है कि हमास को पूरी तरह निरस्त्र किए बिना सेना पीछे नहीं हटेगी। यही रुख़ उस समझौते की शर्तों से टकराता है, जिसकी घोषणा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी।

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