गाजा युद्ध में मीडिया पर बड़ा हमला, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने बताया 267 पत्रकारों की हुई मौत.

अंतरराष्ट्रीय पत्रकार महासंघ यानी International Federation of Journalists (IFJ) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में चल रहे संघर्ष के दौरान अब तक कम से कम 267 मीडिया कर्मियों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, युद्ध की वजह से इस इलाके का 80% से ज्यादा मीडिया इंफ्रास्ट्रक्चर या तो क्षतिग्रस्त हो गया है या पूरी तरह से तबाह हो गया है।
अल जज़ीरा के पत्रकार इब्राहिम अल खलील ने गाजा सिटी से रिपोर्ट करते हुए 31 अगस्त 2026 को इन आंकड़ों की पुष्टि की। पत्रकारों की मौत का यह बढ़ता आंकड़ा इस बात को साफ तौर पर दिखाता है कि गाजा में मीडिया कर्मियों के लिए खतरा कितना बढ़ गया है। इससे पहले 13 अगस्त 2026 को आईएफजे ने कम से कम 240 फिलिस्तीनी पत्रकारों और मीडिया कार्यकर्ताओं की मौत का दस्तावेजीकरण किया था। वहीं दूसरी तरफ, फिलिस्तीनी जर्नलिस्ट्स सिंडिकेट (PJS) ने 9 अगस्त 2026 तक 270 से ज्यादा पत्रकारों के मारे जाने की बात कही थी, जबकि कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने 25 अगस्त 2026 तक 200 से ज्यादा मौतों का आंकड़ा दर्ज किया था।
पत्रकारों के सामने रोजी-रोटी और जान का संकट
जान गंवाने वाले पत्रकारों के अलावा, आईएफजे ने यह भी बताया है कि सैन्य अभियानों की तेजी के कारण एक हजार से ज्यादा मीडिया कर्मियों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। वे अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मीडिया बुनियादी ढांचे का यह विनाश क्षेत्र में हो रही व्यापक तबाही से मेल खाता है। संयुक्त राष्ट्र की 29 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनुमान लगाया गया है कि पूरे गाजा में लगभग 90% नागरिक बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं।
आईएफजे लगातार अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की वकालत कर रहा है। यह कानून साफ तौर पर पत्रकारों को निशाना बनाने पर रोक लगाता है। संगठन इन सभी मामलों में स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है ताकि इन नुकसानों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके और दुनिया के सामने सच आ सके। युद्ध के हालात में काम कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया के मानवाधिकार संगठन अब चिंता जता रहे हैं और लगातार कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।