गाज़ा मानवीय संकट: भूख से जूझती माताएँ, सहायता व्यवस्था पर संकट

गाज़ा: गाज़ा में माताओं की रोज़ की ज़िंदगी अब सिर्फ़ एक वक़्त के खाने की जद्दोजहद बनकर रह गई है। ख़ान यूनिस की नियाहा अल-मसरी जैसी कई महिलाएँ सामुदायिक रसोई की लाइनों में छह घंटे या उससे भी ज़्यादा समय खड़ी रहती हैं, ताकि परिवार के लिए एक थाली खाना मिल सके। 12 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति बताती है कि यहाँ का मानवीय हालात बेहद नाज़ुक मोड़ पर पहुँच चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA के अकिहिरो सेइता ने कहा कि चल रहे सैन्य अभियानों की वजह से गाज़ा लगातार रहने लायक नहीं रह गया है। रिपोर्टों के मुताबिक़ अब तक 21,976 बच्चों की मौत हो चुकी है, वहीं 62,000 से ज़्यादा बच्चे अनाथ हो गए हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि करीब 6,50,000 बच्चे भूख से मौत के कगार पर बताए जा रहे हैं।
माँ और गर्भ में पलते बच्चे पर सीधी मार
मेडेसिन दु मोंद की 11 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में सामने आया कि गर्भवती या स्तनपान कराने वाली 93 प्रतिशत महिलाएँ कुपोषण से पैदा हुई एनीमिया की समस्या से जूझ रही हैं। उनमें से सिर्फ़ 17 प्रतिशत ही संतुलित आहार ले पा रही हैं। पहली छमाही में ही लगभग 4,000 गर्भपात दर्ज हुए, और प्रसव के दौरान मातृ रुग्णता की दर प्रति 1,000 प्रसव पर 82 तक पहुँच गई।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के मुताबिक़ गाज़ा के 21 लाख निवासियों में से 14 लाख लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं, और इनमें से 2,00,000 लोग सबसे ज़्यादा ख़तरे में हैं। दिसंबर 2026 तक काम जारी रखने के लिए WFP को 426 मिलियन डॉलर की ज़रूरत है। खाद्य सुरक्षा क्षेत्र ने चेतावनी दी है कि फंड की कमी के चलते राहत वितरण काफ़ी घट सकता है।
सामान और उपकरणों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोहरे उपयोग वाली श्रेणी में आने वाली मशीनरी समेत कई चीज़ों के रुकने से जीवनरक्षक दवाइयाँ और कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) समय पर नहीं पहुँच पा रहे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के अनुसार जनवरी से अग