गाजा में पांच दिनों से कमर्शियल शिपमेंट बंद होने से बढ़ी महंगाई, अंडे और आटे जैसी जरूरी चीजों के दाम हुए दोगुने

गाजा: इलाके में पांच दिनों से कमर्शियल शिपमेंट पूरी तरह बंद होने की वजह से जरूरी सामानों की कीमतों में भारी उछाल आया है। 19 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, सामान की किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
इजरायली सैन्य निकाय COGAT ने 14 या 15 अक्टूबर को शिपमेंट रोकने का ऐलान किया था। COGAT के डिप्टी प्रवक्ता लेफ्टिनेंट डैनियल कांतोरोविच ने बताया कि फिलिस्तीनी व्यापारियों ने टैक्स और हमास की धमकियों की वजह से खुद समन्वय बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के अनुरोध पर यह नाकेबंदी हटा ली जाएगी।
दूसरी तरफ, गाजा के प्राइवेट ट्रकर्स यूनियन के प्रमुख नाहेद शेहीबर ने इजरायल के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायली अधिकारियों ने एकतरफा प्रतिबंध लगाए हैं और अर्थव्यवस्था मंत्रालय द्वारा ली जाने वाली फीस को सिर्फ बहाना बनाया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था मंत्रालय के अंडरसेक्रेटरी खालिद अल-रकाब ने सफाई दी कि प्रति ट्रक 10,000 शेकेल का शुल्क सरकारी कर्मचारियों की मदद के लिए एक स्वैच्छिक दान है। वहीं, गाजा गवर्नमेंट मीडिया ऑफिस ने इजरायल के दावों को गलत बताया और कहा कि यह पैसा जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए है। ऑफिस ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों से रोजाना 600 ट्रकों के प्रवेश को बहाल करने की अपील की है।
सप्लाई कम होने से बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अंडों के एक कार्टन की कीमत 35 शेकेल से बढ़कर 60-70 शेकेल हो गई है। आटे की एक बोरी जो पहले 25-35 शेकेल की थी, अब 80 शेकेल में मिल रही है। प्याज 5-6 शेकेल से बढ़कर 8-10 शेकेल और एवोकैडो 15 शेकेल प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।
यूएन ऑफिस फॉर द कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनिटेरियन अफेयर्स (OCHA) के मुताबिक, सितंबर 2026 तक गाजा में खाद्य पदार्थों की कीमतें अक्टूबर 2023 के स्तर से 204% अधिक थीं।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने फंड की कमी के कारण सहायता में कटौती करने का फैसला किया है। WFP फिलिस्तीन के डायरेक्टर शॉन ह्यूजेस ने पुष्टि की कि अब 5 लाख लोगों को मिलने वाली मदद कम हो जाएगी। सहायता का दायरा 16 लाख से घटकर 11 लाख रह जाएगा। इसके साथ ही मासिक फूड पार्सल की संख्या 6 लाख और सामुदायिक रसोई में दैनिक गर्म भोजन का उत्पादन 2.5 लाख से घटकर 1.5 लाख रह जाएगा।
नार्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल की शाइना लो ने जोर दिया कि मानवीय सहायता पूरी तरह से काम करने वाले बाजारों का विकल्प नहीं हो सकती। वहीं, बोर्ड ऑफ पीस के डायरेक्टर निकोले म्लाडेनोव ने व्यापारियों के साथ किसी भी तरह के दबाव की निंदा की है और कमर्शियल सप्लाई चेन की सुरक्षा की मांग की है।