Gaza School Start: गाजा में जंग के बीच शुरू हुआ नया शैक्षणिक सत्र, तंबुओं और कारवां में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे

गाजा पट्टी के छात्रों के लिए शनिवार, 19 सितंबर 2026 को 2026/2027 शैक्षणिक वर्ष की आधिकारिक शुरुआत हो गई। फिलिस्तीनी शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने इस तारीख का ऐलान किया था, लेकिन इस दौरान भीषण गर्मी और कक्षाओं को तंबुओं और कारवां में चलाने जैसी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासनिक और शिक्षण कर्मचारियों ने पहले ही 16 सितंबर से अपना काम संभाल लिया था। इस कठिन समय में बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए प्रशासन और शिक्षक पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि छात्रों का भविष्य अंधेरे में न जाए।
गाजा में शिक्षा व्यवस्था की बदतर हालत
यूनीसेफ (UNICEF) के आंकड़ों के मुताबिक, गाजा में 98% स्कूल या तो पूरी तरह तबाह हो चुके हैं या फिर उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद, यूनीसेफ 330,000 से ज्यादा बच्चों की मदद कर रहा है, जबकि फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय का लक्ष्य लगभग 350,000 छात्रों तक पहुंचने का है। कुल मिलाकर लगभग 541,000 छात्र इन शैक्षणिक कार्यक्रमों का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें से 100,000 छात्र यूएनआरडब्ल्यूए (UNRWA) स्कूलों में पढ़ रहे हैं। युद्ध की शुरुआत के बाद से पढ़ाई के सामान की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं, जिससे माता-पिता की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बहुत डरे हुए हैं।
पढ़ाई के घंटों में आई भारी गिरावट
युद्ध और हमलों के कारण बच्चों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है। 7 अक्टूबर 2023 से 17 फरवरी 2026 के बीच 20,000 से ज्यादा छात्र और लगभग 1,000 शिक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। हालात यह हैं कि स्कूल में उपस्थिति अब साल में 200 दिनों से घटकर सिर्फ 60 दिन रह गई है। इसके अलावा, हफ्ते में पढ़ाई के घंटे 30 से घटकर सिर्फ 12 घंटे ही बचे हैं। यूनीसेफ की रिपोर्ट बताती है कि गाजा के शिक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी 114 मिलियन डॉलर के बजट में 50% की भारी कमी बनी हुई है, जिससे मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और तनाव
गाजा के साथ-साथ, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भी इजरायली सैनिकों और बस्तियों के लोगों की हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। 18 सितंबर को बस्तियों के लोगों ने सिलवाद, याब्रूद, बुरका, यासुफ और मासाफेर यट्टा में घरों, खेतों और पेड़ों को निशाना बनाया और कृषि भूमि पर मवेशी छोड़ दिए। नाल्बस के दक्षिण में स्थित अकराबा में गोली लगने से एक फिलिस्तीनी लड़की घायल हो गई। इसके अलावा, बस्तियों के लोगों ने रमाला के पास अल-तिरेह इलाके के बाहरी हिस्से में लगातार दूसरे दिन प्रवेश किया, जिससे वहां के स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इजरायली सेना फिलिस्तीनी इलाकों जैसे उमेर और कुसरे को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर रही है। इस रणनीति का इस्तेमाल कथित तौर पर जमीन पर कब्जा करने और लोगों को वहां से भगाने के लिए किया जा रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच बस्तियों द्वारा कुल 4,914 हमले दर्ज किए गए, जो 2025 की इसी अवधि के मुकाबले 63% ज्यादा हैं। अकेले अगस्त 2026 में 628 हमलों के कारण 164 लोग घायल हुए और 21,508 पेड़ों को नुकसान पहुंचा। प्रतिरोध मामलों के विश्लेषक हानी अल-दाली ने चेतावनी दी है कि यह पूरा इलाका एक बड़े धमाके की तरफ बढ़ रहा है।
पत्रकारों और नागरिकों की धरपकड़
इस बीच, बेथलेहम के पास इजरायली बलों ने फिलिस्तीनी अमेरिकी पत्रकार नाका हामेड को 18 सितंबर को हिरासत में ले लिया। ईरानी से जुड़े एक चैनल के लिए जासूसी करने के आरोपों के बीच उनकी हिरासत को 23 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है। अल जजीरा की रिपोर्टर मारह रायन इन सभी घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि पिछले तीन सालों में इस तरह की हिंसा अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसकी वजह से लगभग 46,000 फिलिस्तीनी लोग अपना घर-बार छोड़कर जाने को मजबूर हो चुके हैं।