गाजा में मौत के साये में पढ़ाई: स्कूल खुले लेकिन हवाई हमलों और स्नाइपर्स का खतरा बरकरार
गाजा में करीब तीन साल बाद स्कूल खुले हैं, लेकिन हवाई हमलों और स्नाइपर्स के कारण बच्चों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।

गाजा: करीब तीन साल के लंबे अंतराल के बाद गाजा में स्कूलों ने फिर से कामकाज शुरू करने की कोशिश की है, लेकिन यहां पढ़ने जाने वाले बच्चों के लिए यह सफर जानलेवा साबित हो रहा है। 31 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, कक्षाओं में जाने वाले छात्रों को इजरायली हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर्स की गोलीबारी का लगातार सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और शिक्षा कर्मियों ने अपनी मौजूदा स्थिति को बयां करते हुए कहा है कि शिक्षा और उनका पूरा जीवन आग के घेरे में है।
गाजा में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, यहां 98 प्रतिशत स्कूल की इमारतें या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 564 स्कूल इमारतों में से 526 को या तो पूरी तरह से फिर से बनाने की जरूरत है या बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है।
हालात इतने खराब हैं कि यूनिसेफ ने 200 केंद्रों के माध्यम से 560,000 बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाने में मदद तो की है, लेकिन अब भी करीब 200,000 छात्र ऐसी शिक्षा से वंचित हैं जो व्यवस्थित हो। इसके अलावा, गाजा में लगभग 60 मिलियन टन विस्फोटक युक्त मलबा मौजूद है, जो पढ़ाई की राह में एक बड़ी बाधा बना हुआ है। एजुकेशन क्लस्टर ने बताया कि 2026/2027 शैक्षणिक वर्ष के लिए 771,200 से अधिक स्कूली बच्चों को सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन फंड की कमी ने इस काम को मुश्किल बना दिया है।
इस संघर्ष की मानवीय कीमत बहुत भारी रही है। 18 से 24 अक्टूबर 2026 के बीच गाजा में 10 बच्चों और एक शिक्षक की जान चली गई। 17 अक्टूबर को देइर अल-बलाह में यूनिसेफ समर्थित लर्निंग सेंटर से लौट रहे 14 वर्षीय मुहम्मद हमद की मौत हो गई। वहीं, 21 अक्टूबर को जबालिया के मुरदिया स्कूल में गोलीबारी के दौरान दो स्कूली छात्राएं घायल हो गईं।
संकट केवल गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि वेस्ट बैंक में भी शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। एजुकेशन क्लस्टर ने 1 सितंबर से 20 अक्टूबर 2026 के बीच शिक्षा से जुड़ी 174 घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है, जिससे 140 स्कूल और 24,500 छात्र प्रभावित हुए हैं। सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक, सैन्य प्रतिबंधों और बस्तियों में रहने वालों की हिंसा के कारण लगातार चौथे शैक्षणिक वर्ष में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बाधित हुई है।