गाजा में रहने के लिए छत नहीं, खतरनाक इमारतों में रहने को मजबूर हुए लोग

Nura Basta18 September 20262 min read17 viewsWorld
गाजा में रहने के लिए छत नहीं, खतरनाक इमारतों में रहने को मजबूर हुए लोग

गाजा पट्टी में रहने वाले बेघर फलस्तीनी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर खतरनाक और टूटी-फूटी इमारतों में रहने को मजबूर हैं। सुरक्षित जगहों की भारी कमी और अपने घरों तक पहुंच न होने के कारण इन लोगों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा का 60% से ज्यादा हिस्सा अभी भी इजरायली सेना के नियंत्रण में है, जिसकी वजह से लोग अपने पुराने घरों में वापस नहीं लौट पा रहे हैं। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र की एक साझा रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय 10 लाख से अधिक लोग असुरक्षित और खतरनाक जगहों पर टेंट या तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।

इमारतों के गिरने से बढ़ रही हैं मुश्किलें

लोगों की यह परेशानी तब और ज्यादा बढ़ गई जब लगातार पुरानी और क्षतिग्रस्त इमारतें ढहने लगीं। हाल ही में बुधवार, 17 सितंबर 2026 को गाजा सिटी में एक इमारत के अचानक गिरने से 21 लोगों की मौत हो गई थी। इसके ठीक बाद शुक्रवार, 18 सितंबर को एक छत गिरने की घटना में 4 बच्चे बुरी तरह घायल हो गए। गाजा सिटी वाली घटना के बाद चलाए गए खोज और बचाव अभियान के दौरान कुल 75 शवों को बाहर निकाला गया है। फलस्तीनी लोक निर्माण मंत्रालय के अनुसार, गाजा में 2,000 से ज्यादा ऐसी इमारतें हैं जो कभी भी गिर सकती हैं और उन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने यह जानकारी दी है कि केवल सितंबर महीने के पहले हफ्ते में ही आश्रय स्थलों की ढहने की 5 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं।

राहत कार्यों में आ रही है भारी रुकावट

आम नागरिकों तक मदद पहुंचाने के काम में कई तरह की रुकावटें आ रही हैं, खासकर उन चीजों को लेकर जिन्हें दोहरे उपयोग वाली वस्तुएं माना जाता है और जिनमें जरूरी निर्माण सामग्री भी शामिल है। नार्वेजियन शरणार्थी परिषद की प्रवक्ता शाइना लो ने बताया कि लोग बुरी तरह टूटी हुई इमारतों में रहने को इसलिए मजबूर हैं क्योंकि वहां आने वाले टेंटों की आपूर्ति पूरी तरह से बंद है। इसके अलावा, यूनिसेफ आने वाले सर्दियों के मौसम को देखते हुए 5,40,000 बच्चों और उनके परिवारों की मदद के लिए 97.5 मिलियन डॉलर जुटाने की कोशिश कर रहा है। इजरायली सरकार का यह साफ कहना है कि जब तक हमास को पूरी तरह से हथियार नहीं डाले जाते, तब तक पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं दूसरी तरफ, मानवाधिकार अधिकारियों ने मलबे के नीचे से शव मिलने और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। इस पूरी मानवीय स्थिति के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप ReliefWeb की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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