गाजा में सीजफायर के बावजूद फिर हुआ हमला, इसराइल की एयरस्ट्राइक में तीन फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत.

गाजा पट्टी में युद्ध विराम के तमाम प्रयासों के बावजूद हिंसा का दौर लगातार जारी है और हालिया हमलों में तीन लोगों की जान चली गई है। स्थानीय मेडिकल सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को हुए अलग-अलग हमलों में कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से वहां के हालात को बेहद डरावना बना दिया है और आम जनता के लिए जीवन जीना बहुत मुश्किल हो गया है।
गाजा सिटी और खान यूनिस में इसराइली सेना का हमला
गाजा सिटी में इंडस्ट्रियल जंक्शन के पास इसराइली ड्रोन ने एक साइकिल को निशाना बनाया, जिसकी चपेट में आने से एक फिलिस्तीनी व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा दक्षिणी गाजा के खान यूनिस इलाके के पास विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए एक तंबू पर इसराइली बलों ने हमला कर दिया। इस हमले में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए। वहीं दूसरी तरफ, गाजा सिटी के पश्चिम में स्थित अल-शाती शरणार्थी शिविर में एक घर पर हुए पिछले ड्रोन हमले में गंभीर रूप से घायल एक नौजवान ने अल-शिफा अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
युद्ध विराम के बाद से अब तक हजारों मौतें
गाजा सिटी और खान यूनिस के पूर्वी इलाकों में इसराइली सेना की ओर से लगातार गोलाबारी की जा रही है। यह सब हिंसा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका समर्थित युद्ध विराम अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, उस समझौते के शुरू होने के बाद से अब तक 1,300 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 4,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक कुल मरने वालों का आंकड़ा 73,400 को पार कर गया है और 174,400 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं। गाजा के सिविल डिफेंस प्राधिकरण ने पिछले हमलों में तबाह हुए 20 घरों के मलबे से हाल ही में 233 लोगों के शव निकाले हैं, जिनमें 73 बच्चे और 106 महिलाएं शामिल थीं।
कूटनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा युद्ध विराम पहल का नेतृत्व कर रहे बोर्ड ऑफ पीस के उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव ने बुधवार, 26 अगस्त 2026 को जारी सैन्य गतिविधियों के लिए इसराइल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी प्रस्ताव के विफल होने पर युद्ध और अधिक भीषण रूप ले सकता है। म्लादेनोव ने बताया कि हमास ने हथियारों को छोड़ने और नागरिक शासन की तरफ बढ़ने के प्रावधानों पर सहमति जता दी है। हालांकि इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी बात पर अड़े हैं और उनका कहना है कि जब तक हमास अपने सारे हथियार नहीं सौंप देता, तब तक इसराइली सेना अपनी वर्तमान स्थिति में ही बनी रहेगी। संयुक्त राष्ट्र में इसराइल की उप राजदूत नोआ फर्मा ने ट्रंप प्रशासन की योजना का समर्थन तो किया, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि आगे की कोई भी प्रगति हमास के हथियार डालने पर ही निर्भर करती है। इसराइली सेना ने 27 अगस्त को सामने आए इन हमलों की रिपोर्ट पर फिलहाल कोई भी तुरंत प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।