गाजा में तीन साल बाद खुले स्कूल, भयानक तबाही के बीच पांच लाख बच्चे लौटे क्लासरूम.

गाजा पट्टी में करीब तीन साल लंबे अंतराल के बाद आखिरकार शनिवार, 19 सितंबर 2026 को सैकड़ों-हजारों बच्चों ने स्कूलों में वापसी की और अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की। फलस्तीनी शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने इस दौरान मौजूदा हालात को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया, इसके बावजूद नए शैक्षणिक सत्र 2026-2027 की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। बच्चों की पढ़ाई को दोबारा पटरी पर लाने के लिए मंत्रालय ने एक खास व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत छात्रों को स्कूल आकर पढ़ाई करने या फिर ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, किसी भी छात्र को एक ही समय में दोनों तरीकों से जुड़ने की अनुमति नहीं दी गई है और उन्हें किसी एक विकल्प का ही चुनाव करना होगा।
तबाही के आंकड़े और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति
पूर्वी खान यूनिस के शिक्षा निदेशक इब्राहिम रमजान ने जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर 2023 से चल रहे संघर्ष की वजह से अब तक लगभग 22,000 छात्रों और 770 से अधिक शिक्षा कर्मियों की जान जा चुकी है। मरने वालों में कुल 532 शिक्षक भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी UNICEF के आंकड़ों के मुताबिक, गाजा के करीब 98 फीसदी स्कूल या तो पूरी तरह तबाह हो चुके हैं या फिर उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, लगभग 93 प्रतिशत शिक्षण संस्थानों को फिर से मरम्मत और बड़े स्तर पर सुधार की सख्त जरूरत है। पश्चिमी गाजा में शिक्षा के निदेशक डॉ. जवाद अल-शेख खलील ने इस बात की पुष्टि की है कि कुल 500,000 से अधिक बच्चे वापस स्कूल लौटे हैं, जबकि इससे पहले अनुमानित 660,000 बच्चे लंबे समय तक कक्षाओं से दूर रहे थे।
अस्थाई तंबू और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
गाजा में पढ़ाई का माहौल अभी भी बहुत खराब स्थिति में है, और शिक्षा अधिकारियों का अनुमान है कि इस समय केवल 320 चालू स्कूल और सीखने के केंद्र ही किसी तरह काम कर पा रहे हैं। खान यूनिस में रहने वाले मोएइद अबू मुस्तफा जैसे कई छात्र यह बता रहे हैं कि उन्हें बिना हवादार तंबू के अंदर जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है, जहां नोटबुक और पेन जैसी बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA ने गाजा में 86 अस्थाई शिक्षण केंद्र बनाए हैं और बच्चों को पढ़ाने के लिए मिश्रित शिक्षण मॉडल चला रही है। हालांकि, कई कक्षाओं में आज भी बेंच और डेस्क नहीं होने के कारण बच्चों को मजबूरन नीचे कंबल बिछाकर बैठना पड़ता है। इसके साथ ही, यूनिसेफ इस समय कम से कम 540,000 छात्रों को व्यक्तिगत कक्षाओं में सहायता प्रदान कर रहा है, जबकि संगठन सेव द चिल्ड्रन का कहना है कि आज भी करीब 1.5 मिलियन स्कूली बच्चे सुरक्षित और अच्छी शिक्षा से पूरी तरह दूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार और बच्चों की मानसिक स्थिति
शिक्षा मंत्रालय ने UNRWA से अपील की है कि वह अपने स्कूलों को दोबारा खोलने के काम में तेजी लाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी आग्रह किया है कि वे उन परिवारों के लिए रहने की स्थाई व्यवस्था करें जो इस समय स्कूलों और शैक्षणिक इमारतों में शरण लिए हुए हैं। छात्रों में यामेन अबू समरा जैसे कई बच्चों ने लगातार जारी हिंसा को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि इस तरह के तनावपूर्ण माहौल और तिरपाल, टिन की चादरों व लकड़ी से बनाए गए अस्थाई तंबू नुमा कमरों में पढ़ाई करना उनके लिए बहुत मुश्किल हो रहा है। बच्चे लगातार डर और अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक सेहत दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।