गाजा के छात्रों के लिए नया शैक्षणिक सत्र शुरू, मलबे और तंबुओं के बीच लौटाई पढ़ाई.

Aanya20 September 20263 min read1 viewWorld
गाजा के छात्रों के लिए नया शैक्षणिक सत्र शुरू, मलबे और तंबुओं के बीच लौटाई पढ़ाई.

गाजा पट्टी के फिलिस्तीनी छात्र करीब तीन साल के लंबे संघर्ष और भारी तबाही के बाद आखिरकार 2026-2027 के नए शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षाओं में वापस लौट आए हैं। इस कठिन समय में भी बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी पूरी मुस्तैदी से अपने काम पर वापस आ गए हैं, जहां 16 सितंबर 2026 को शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी शुरू की और 19 सितंबर 2026 को छात्रों ने दोबारा पढ़ाई शुरू की।

शिक्षा मंत्रालय और यूनिसेफ की नई पहल

फिलिस्तीनी शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने इस शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 20 सितंबर को आधिकारिक तौर पर घोषित की है। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक इस बार विभिन्न ऑफलाइन और ऑनलाइन कार्यक्रमों में 500,000 से 541,000 छात्र हिस्सा ले रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई करने के लिए मंत्रालय ने दर्जनों फील्ड स्कूल और वैकल्पिक शिक्षण स्थान तैयार किए हैं। इसके अलावा करीब 700 शैक्षणिक स्थलों और 25 अस्थायी स्कूलों तक इस दायरे को बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य त्वरित पाठ्यक्रम के जरिए करीब 350,000 छात्रों तक पहुंचना है। साथ ही यूनेरवा (UNRWA) से अपने परिसरों को फिर से खोलने की अपील की गई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन परिवारों के लिए स्थायी आवास की मांग की गई है जो वर्तमान में स्कूल की इमारतों में शरण लिए हुए हैं।

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तंबुओं और मलबे के बीच पढ़ाई की मजबूरी

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी यूनिसेफ (UNICEF) के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा की 98 प्रतिशत स्कूल इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिनमें से 93 प्रतिशत से ज्यादा को भारी पुनर्निर्माण की जरूरत है। मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के लिए यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक एजुआर्ड बेइगबेडर ने इस बात पर चिंता जताई है कि लाखों बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा तक पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यूनिसेफ ने बच्चों को पढ़ाने के लिए 'बैक-टू-Learning' अभियान शुरू किया है, जिसके तहत साल 2026 के पहले छह महीनों में ही 173 लर्निंग सेंटर के माध्यम से 265,000 बच्चों तक मदद पहुंचाई जा चुकी है। हालांकि कई जगहों पर बच्चे आज भी तंबुओं और मलबे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं जहाँ उनके पास बैठने के लिए बुनियादी डेस्क और किताबें तक मौजूद नहीं हैं।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियों का सहयोग

इस संकट की घड़ी में यूनेरवा (UNRWA) भी लगातार अपनी सेवाएं दे रहा है और अब तक उसने 86 लर्निंग स्पेस खोले हैं। यूनेरवा के शिक्षा कार्यक्रम के प्रमुख तौफिक अल-हौरानी ने बताया कि एजेंसी के सुसज्जित 182 स्कूलों में से 95 प्रतिशत से अधिक या तो नष्ट हो चुके हैं या फिर वहां विस्थापित लोग रह रहे हैं। वर्तमान में करीब 72,051 छात्र कक्षाओं के पहले चरण में ऑफलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि लगभग 280,000 छात्र रिमोट लर्निंग यानी ऑनलाइन या घर से पढ़ाई के जरिए जुड़े हुए हैं। कई बार हालात इतने बुरे होते हैं कि बच्चों को अस्थायी कक्षाओं के फर्श पर कंबल बिछाकर बैठना पड़ता है।

छात्रों को हो रहा है बड़ा नुकसान

अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से अब तक 20,000 से अधिक छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं और 620,000 से ज्यादा बच्चे नियमित स्कूली शिक्षा से वंचित हो चुके हैं। इस स्थिति के कारण बच्चों की शिक्षा कम से कम पांच साल पीछे जाने का खतरा पैदा हो गया है। इस मुश्किल हालात में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) लगातार छात्रों को हाई-एनर्जी बिस्कुट मुहैया करा रहा है, जबकि स्थानीय वॉलंटियर और शिक्षक अत्यधिक तनाव और मुश्किलों के बीच बच्चों को पढ़ाने का काम जारी रखे हुए हैं।

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