गाजा में तंबुओं और उधार के फूलों के बीच शादियां, संघर्ष के बीच उम्मीद की एक अनूठी पहल.

गाजा में चल रहे भीषण संघर्ष और गंभीर मानवीय संकट के बीच फलस्तीनी जोड़े तंबुओं में शादियां करने और उधार के फूलों से काम चलाने को मजबूर हैं। आम आदमी के जीवन में अनिश्चितता के इस दौर में भी लोग भविष्य की योजना बनाने और अपनी संस्कृति को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। युद्ध और तबाही के इस माहौल में शादी की रस्में अब प्रतिरोध का एक बड़ा प्रतीक बनती जा रही हैं, जहां लोग तमाम मुश्किलों के बाद भी जिंदगी को आगे बढ़ाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
खान यूनिस में सामूहिक विवाह और सांस्कृतिक धरोहर
बीते 7 सितंबर 2026 को खान यूनिस में एक बड़े सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया, जिसमें 120 जोड़ों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करना था, जिसने पिछले कई सालों से लोगों की शादियों को रोक रखा था। दूल्हों के रूप में शामिल हुए बासेम अल-सिक्सिक और खालिद शात ने इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक विरासत और उम्मीद के संदेश का एक जरिया बताया। खान यूनिस के उप मुफ्ती शेख हमदान शर्राब ने समुदाय के बीच आपसी भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देने की बात पर जोर दिया। इसके अलावा, एक स्थानीय कैंप में एक ही दिन में 50 शादियों का पंजीकरण करने वाले वकील ने हमास के आंतरिक मंत्रालय के पास अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई। इतिहास में जहां हर साल औसतन 20,000 शादियों का पंजीकरण होता था, वहीं इस साल अप्रैल तक गाजा और उत्तरी पट्टी में केवल 61 शादियां ही दर्ज की जा सकी थीं।
बाल विवाह में बढ़ोतरी और आर्थिक तंगी का संकट
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA के प्रतिनिधि नेस्टर ओवोमुहांगी ने 10 सितंबर 2026 को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों में बाल विवाह के मामलों में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण अत्यधिक आर्थिक तंगी, बेरोजगारी का स्तर बढ़कर 80 प्रतिशत पहुंच जाना और तंबू बस्तियों में भारी भीड़ होना है। वर्तमान समय में एक शादी का कुल खर्च लगभग 530 अमेरिकी डॉलर आ रहा है। इस भारी खर्च और संकट की मुख्य वजह यह है कि युद्ध के दौरान लगभग 93 प्रतिशत वेडिंग हॉल और होटल पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं, जिसके कारण जोड़ों को रहने के लिए तंबू और गद्दे खरीदने पड़ रहे हैं।
विभिन्न राहत संगठनों के प्रयास और जमीनी हकीकत
अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, अल-फारिस अल-शाहम फाउंडेशन ने इससे पहले 25 अप्रैल 2026 को दीर अल-बलाह में 'थोब अल-फराह 2' नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें 300 जोड़े शामिल हुए थे। इसके अलावा 11 सितंबर 2026 को यरुशलम के पास 'लव इन द टाइम ऑफ अपार्थाइड' अभियान के तहत एक प्रतीकात्मक शादी के आयोजन को इजरायली सैनिकों द्वारा दबा दिया गया, जो परिवारों को फिर से मिलाने से रोकने वाले कानूनों का विरोध कर रहा था। इस क्षेत्र में मानवीय स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और 7 अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक 1.4 मिलियन यानी चौदह लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। इस संघर्ष में 72,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं और 173,000 से अधिक घायल हुए हैं। IRC, UNICEF, UNRWA, OCHA और WFP जैसे कई प्रमुख संगठनों ने यह भी बताया है कि इस तबाही की वजह से क्षेत्र का मानव विकास 77 साल पीछे चला गया है।