गाजा में सर्दी का कहर: ढहने की कगार पर 2 हजार इमारतें, तंबू डूबे
गाजा में पहली विंटर स्टॉर्म से हालात बदतर हुए। पूर्व UNRWA चीफ फिलिप लाज़रिनी ने मानवीय सहायता की तत्काल मांग की है।

गाजा: पूर्व UNRWA कमिश्नर-जनरल फिलिप लाज़रिनी ने गाजा में मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल अपील की है। उन्होंने कहा कि युद्धविराम लागू होने के एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वहां की आबादी मलबे के बीच संघर्ष कर रही है।
7 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजन के पहले विंटर स्टॉर्म (सर्दियों के तूफान) ने गाजा पट्टी में मानवीय स्थिति को और ज्यादा खराब कर दिया है। गाजा की इमरजेंसी कमेटियों और सिविल डिफेंस के अनुसार, क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की हालत बेहद नाजुक है।
अकेले गाजा सिटी में 2,000 से अधिक ऐसी इमारतें चिह्नित की गई हैं, जिनके गिरने का खतरा बना हुआ है। भारी बारिश और तेज हवाओं की वजह से विस्थापन शिविरों में बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई है, जिससे करीब 2 लाख जर्जर तंबू प्रभावित हुए हैं।
सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने संसाधनों की भारी कमी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे परिवारों को आश्रय देने के लिए कोई अतिरिक्त तिरपाल या तंबू नहीं हैं, जो इस समय जमा देने वाली ठंड और बारिश के बीच खुले में रहने को मजबूर हैं।
क्षेत्र में मानवीय सहायता की डिलीवरी पर अभी भी कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं। रोजाना करीब 180 से 200 ट्रक ही गाजा में प्रवेश कर पा रहे हैं, जबकि युद्धविराम समझौते के मानवीय प्रोटोकॉल के तहत यह लक्ष्य 600 ट्रकों का था।
सहायता संगठनों ने बताया कि ईंधन, आवश्यक शेल्टर सामग्री और मरम्मत के उपकरणों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों के कारण सर्दियों की तैयारी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है।
दूसरी ओर, UN वॉच जैसी कानूनी संस्थाओं ने फिलिप लाज़रिनी की राजनयिक छूट (डिप्लोमैटिक इम्युनिटी) को हटाने की मांग की है, ताकि उनके प्रशासनिक कार्यकाल की जांच की जा सके। लाज़रिनी का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है।