सर्दियों की दस्तक से गाजा में बड़ा मानवीय संकट आने की आशंका, संयुक्त राष्ट्र ने करीब 10 लाख विस्थापितों के लिए जताई चिंता

गाजा: सर्दियों के मौसम की आहट के साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गाजा में करीब 10 लाख विस्थापित फिलिस्तीनियों पर बाढ़, जमा देने वाली ठंड और जारी सैन्य अभियानों का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक रमीज अलकबरोव ने सुरक्षा परिषद को बताया कि लगभग 9.5 लाख लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जहां बाढ़ का मध्यम से उच्च जोखिम है।
अलकबरोव के मुताबिक, वर्तमान में करीब 4 हजार इमारतें शेल्टर के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं, जिनके ढहने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि 'येलो लाइन' के पास रहने वालों के लिए युद्धविराम सिर्फ नाम का है, क्योंकि गाजा और वेस्ट बैंक दोनों जगहों पर घातक हमले और इमारतों को गिराने का काम जारी है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों का कहना है कि इजरायली पाबंदियों और फंड की कमी के कारण राहत तैयारियों में भारी दिक्कत आ रही है। आईओएम की महानिदेशक एमी पोप ने बताया कि सर्दियों की जरूरतों का केवल 17 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया है। करीब 8,600 इमरजेंसी शेल्टर किट इजरायली अधिकारियों द्वारा 'दोहरे उपयोग' वाली वस्तुएं बताकर गाजा के बाहर ही रोक दिए गए हैं।
यूरोपीय संघ ने इजरायल से मांग की है कि मानवीय सहायता के लिए तुरंत और बिना किसी रुकावट के रास्ता खोला जाए और बॉर्डर क्रॉसिंग को दोबारा शुरू किया जाए। गाजा की 90 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो चुकी है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाएं भी बदहाल स्थिति में हैं। मेडिसीन सैन्स फ्रंटियर्स के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 1,700 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं। फिलिस्तीनी सामाजिक विकास मंत्रालय का अनुमान है कि आने वाले खराब मौसम के कारण 3 लाख परिवारों पर बड़ी मुसीबत आ सकती है।
फंड की भारी कमी की वजह से वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को 75,000 परिवारों के लिए नकद हस्तांतरण में कटौती करनी पड़ी है। ओचा के मिशेल साद ने मौजूदा हालात को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि अक्टूबर 2025 में घोषित युद्धविराम के बावजूद, पिछले एक साल में इजरायली ऑपरेशन्स में करीब 1,500 फिलिस्तीनियों की जान गई है, जिनमें 320 से ज्यादा बच्चे और 140 महिलाएं शामिल हैं।