ईरान के मिसाइल हमलों पर GCC का बड़ा फैसला, एकजुट होकर देने की दी चेतावनी

ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर किए गए हालिया बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने कड़ा रुख अपना लिया है। मनमा में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें संप्रभु राष्ट्रों पर "खुली आक्रामकता" करार दिया गया है। GCC ने स्पष्ट कर दिया है कि यह न केवल सदस्य देशों की सुरक्षा बल्कि वहां रहने वाले लाखों प्रवासी समुदाय के लिए भी एक सीधा खतरा है।
एक पर हमला, सब पर हमला: GCC की नई रणनीति
GCC मंत्रिस्तरीय परिषद ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि किसी भी एक सदस्य देश पर किया गया हमला, पूरे समूह पर हमला माना जाएगा। परिषद ने अपने संयुक्त हवाई रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर भरोसा जताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला दिया है। इसका अर्थ है कि GCC के पास आत्मरक्षा का पूर्ण अधिकार है और वे सामूहिक रक्षा उपायों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बढ़ता खतरा और बुनियादी ढांचे को नुकसान
क्षेत्र में तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सात महीनों में हजारों मिसाइलों और ड्रोन ने इस इलाके को निशाना बनाया है। बहरीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों से न केवल हवाई अड्डों और आवासीय क्षेत्रों को नुकसान पहुँचा है, बल्कि महत्वपूर्ण बिजली और जल शोधन संयंत्रों (desalination plants) को भी निशाना बनाया गया है।
- नागरिकों पर प्रभाव: कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दर्जनों लोग घायल हुए हैं और बहरीन में एक मोरक्कन ठेकेदार की जान भी जा चुकी है।
- आर्थिक असर: हमलों के कारण सऊदी अरब में स्कूल बंद करने पड़े हैं, हवाई अड्डों का संचालन प्रभावित हुआ है और वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है।
- सुरक्षा जोखिम: यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंडेब और सऊदी तेल मार्गों को लगातार खतरा पैदा किया जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास
भले ही सैन्य तनाव चरम पर है, लेकिन GCC ने कूटनीतिक दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। मंत्रियों ने कहा कि यदि ईरान अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत रोकता है, तो बातचीत का रास्ता खुला है। वर्तमान में, सऊदी अरब और UAE क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। वहीं, ओमान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है और कतर ईरान के साथ अपने राजनयिक संपर्क बनाए हुए है।
इस बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर उन लाखों प्रवासी श्रमिकों पर पड़ेगा जो दुबई, दोहा, मनमा, रियाद और मस्कट जैसे प्रमुख शहरों में काम कर रहे हैं। इनमें भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा अब GCC की सामूहिक रक्षा नीति का मुख्य केंद्र बन गई है।