अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच GCC देशों ने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति पर किया पुनर्विचार
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण GCC देशों ने अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार शुरू किया है। जानें मनमा संवाद और IISS रिपोर्ट की मुख्य बातें।

बहरीन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों ने अपनी रक्षा प्रणालियों को फिर से तैयार करने की जरूरत महसूस की है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) द्वारा 2026 मनमा संवाद की शुरुआत में जारी एक अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया है कि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा रूपरेखा में बदलाव करना होगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष ने शीतयुद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए सीधे ईरानी हमलों और भारी आर्थिक नुकसान के बाद अब अमेरिकी सुरक्षा गारंटियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। बहरीन इस चुनौती के केंद्र में है, जहां ईरानी हमलों ने अमेरिकी नौसेना की सुविधाओं और 5वें बेड़े (5th Fleet) को नुकसान पहुंचाया है।
25 जून 2026 को मनमा में हुई GCC-US मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बिना किसी रोक-टोक के नेविगेशन की मांग की थी। इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान को ईरान ने 26 जून 2026 को "हस्तक्षेप करने वाला, गैर-जिम्मेदार और उकसाने वाला" करार देते हुए खारिज कर दिया।
इससे पहले 10 जून 2026 को GCC मंत्रिस्तरीय परिषद ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हुए ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की थी। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय का तर्क है कि क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है। ईरान ने ओमान में इराक और खाड़ी देशों के साथ एक सुरक्षा शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बहरीन ने सितंबर 2026 में इसमें शामिल होने से आधिकारिक तौर पर मना कर दिया।
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ बिन राशिद अल जायनी ने कहा कि GCC की सुरक्षा अविभाज्य है। उन्होंने ईरान को उसकी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने से रोकने के लिए वाशिंगटन के साथ करीबी सहयोग का आह्वान किया। वहीं, GCC महासचिव जासिम मोहम्मद अलबुदईवी ने ईरानी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
तीन दिनों तक चलने वाले मनमा संवाद में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं, जहां युद्ध के आर्थिक और राजनीतिक परिणामों पर चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के बावजूद, बहरीन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बना हुआ है।