मनामा में जीसीसी और रूस की बैठक हुई जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई

मनामा: गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) और रूस के बीच रणनीतिक संवाद के लिए नौवीं संयुक्त मंत्री स्तरीय बैठक रविवार दोपहर मनामा में आयोजित की गई। इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अन्य जीसीसी देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
बैठक की शुरुआत करते हुए जीसीसी मंत्री परिषद के वर्तमान सत्र के अध्यक्ष और बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लातिफ अल ज़यानी ने कहा कि जीसीसी देशों की सुरक्षा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बुनियादी तत्व है। उन्होंने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया और नागरिक बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण सुविधाओं और हवाई अड्डों पर हूती मिलिशिया द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की।
डॉ. अल ज़यानी ने रूस से आग्रह किया कि वह ईरान के साथ अपने राजनयिक संबंधों का उपयोग करे ताकि तेहरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने यह मांग भी की कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी भविष्य की किसी भी बातचीत या व्यवस्था में जीसीसी देशों को शामिल किया जाए।
फिलिस्तीनी मुद्दे पर बात करते हुए डॉ. अल ज़यानी ने तनाव कम करने के रूस के आह्वान और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए व्यापक समाधान की वकालत करने की सराहना की।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि जीसीसी के साथ सहयोग बढ़ाना रूसी कूटनीति की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। लावरोव ने बताया कि पिछले साल रूस और खाड़ी देशों के बीच व्यापार में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के बीच संबंध को दर्शाता है।
यह मंत्री स्तरीय बैठक 168वीं जीसीसी मंत्री परिषद की बैठक के साथ आयोजित की गई थी। जीसीसी महासचिव जासेम अलबुदईवी ने बताया कि परिषद संयुक्त खाड़ी कार्रवाई से जुड़े विषयों का मूल्यांकन करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की समीक्षा करना जारी रखेगी।