हूती हमलों के बीच जीसीसी ने सऊदी अरब की सुरक्षा को बताया खाड़ी देशों की स्थिरता के लिए जरूरी और दिया पूरा समर्थन

Mohd. Irfan16 October 20262 min read0 viewsSaudi
हूती हमलों के बीच जीसीसी ने सऊदी अरब की सुरक्षा को बताया खाड़ी देशों की स्थिरता के लिए जरूरी और दिया पूरा समर्थन

रियाद: गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने साफ किया है कि सऊदी अरब की सुरक्षा पूरे खाड़ी सुरक्षा तंत्र का एक बुनियादी आधार है। काउंसिल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सभी सदस्य देश सऊदी अरब को उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में पूरा समर्थन करते हैं।

यह फैसला हूती मिलिशिया द्वारा सऊदी अरब के नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे लगातार सैन्य हमलों के बाद आया है। 10 अक्टूबर 2026 को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए। सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट का कामकाज लंबे समय के लिए रोक दिया गया है।

सुरक्षा की इसी खराब स्थिति की वजह से जीसीसी और यूरोपीय संघ ने अपने दूसरे शिखर सम्मेलन को टालने का फैसला किया है। यह समिट 24 अक्टूबर 2026 को रियाद में होने वाली थी। जीसीसी महासचिव जासेम मोहम्मद अलबुदईवी ने बताया कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने की हूती कोशिशों के बीच प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए इसे स्थगित करना जरूरी था।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सऊदी अरब को समर्थन मिला है। 15 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से माना कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सऊदी अरब को आत्मरक्षा का अधिकार है। परिषद ने हूती मिलिशिया की सैन्य कार्रवाई की निंदा की और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत डॉ. अब्दुलअजीज बिन मोहम्मद अलवासिल ने 16 अक्टूबर को सुरक्षा परिषद में इस अधिकार को दोहराया। उन्होंने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक कार्रवाई करने की अपील की।

क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने 7 अगस्त 2026 को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत इस समझौते के जरिए पाकिस्तान के लगभग 8,000 सैनिकों को रक्षा क्षमता के तौर पर सऊदी अरब में तैनात किया गया है।

कतर और बहरीन समेत अन्य सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब की संप्रभुता का कोई भी उल्लंघन पूरे खाड़ी तंत्र की स्थिरता के लिए सीधा खतरा माना जाएगा।

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