GCC देश बने वर्कप्लेस AI अपनाने में दुनिया में आगे, 90 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी कर रहे हैं इस्तेमाल.

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC देशों ने दफ्तरों और कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल के मामले में पूरी दुनिया में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप यानी BCG की चौथी सालाना रिपोर्ट 'स्ट्रेटेजी मैटर्स मोर दैन टूल्स' के मुताबिक, खाड़ी देशों के दफ्तरों में एआई का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि गल्फ देशों के कामकाजी लोग नई तकनीक को अपनाने में सबसे आगे चल रहे हैं।
रिपोर्ट में सामने आए बड़े आंकड़े
बोसॉन कंसल्टिंग ग्रुप की इस रिपोर्ट के अनुसार, GCC क्षेत्र में काम करने वाले 93% फ्रंटलाइन कर्मचारी और 95% मैनेजर व लीडर हफ्ते में कई बार एआई का इस्तेमाल करते हैं। यह ग्लोबल स्तर पर चल रहे औसत से कहीं ज्यादा है। आपको बता दें कि यह पूरी रिसर्च 3 जून 2026 को जारी की गई थी, जिसमें दुनिया भर के 14 बाजारों से कुल 11,749 कामगारों से बातचीत की गई थी। पूरी दुनिया की बात करें तो फ्रंटलाइन कर्मचारियों के बीच एआई अपनाने का औसत करीब 74% तक पहुंचा है।
कर्मचारियों का बच रहा है कीमती समय
इस रिसर्च से यह बात भी सामने आई है कि जो फ्रंटलाइन कर्मचारी नियमित रूप से एआई का उपयोग कर रहे हैं, उनमें से 42% लोग हफ्ते में अपना कम से कम एक पूरा आठ घंटे का दिन बचा पा रहे हैं। एआई की मदद से काम तेजी से होने के कारण लोगों का समय बच रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि कंपनियों के स्तर पर इस बचे हुए समय के इस्तेमाल को लेकर सही दिशा-निर्देश नहीं मिल पा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 66% कर्मचारियों को यह पता ही नहीं होता कि बचे हुए समय का सही उपयोग कैसे किया जाए और आधे से ज्यादा लोग इस समय को जरूरी योजनाओं में नहीं लगा पाते हैं।
रणनीति का होना सबसे ज्यादा जरूरी
BCG के जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक एआई का सही फायदा उठाने के लिए केवल अच्छे टूल्स होना ही काफी नहीं है, बल्कि एक मजबूत रणनीति का होना बहुत जरूरी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों और अन्य कामगारों के लिए भी यह बदलाव बहुत मायने रखता है, क्योंकि आने वाले समय में दफ्तरों का कामकाज पूरी तरह बदल रहा है। कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे सिर्फ तकनीक पर पैसा खर्च न करें, बल्कि कर्मचारियों को यह भी सिखाएं कि उस तकनीक का सही इस्तेमाल करके अपने काम को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।