जिनेवा में लगी प्रदर्शनी, बांग्लादेश और पाकिस्तान में मानवाधिकार हनन का मुद्दा उठाया
Bangladeshi diaspora in Geneva holds a powerful photo exhibition highlighting human rights violations in Bangladesh and Pakistan.

स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में इन दिनों संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान एक विशेष फोटो प्रदर्शनी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिनेवा के प्रसिद्ध 'ब्रोकेन चेयर' स्मारक के पास आयोजित इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य दुनिया का ध्यान दक्षिण एशिया के इन दो देशों में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर आकर्षित करना है। इस आयोजन को बांग्लादेशी डायस्पोरा के सदस्यों द्वारा अंजाम दिया गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर अपनी बात रखी।
लगभग 30 पोस्टरों के जरिए उजागर हुई हकीकत
मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शनी में करीब 30 पोस्टर प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें से 15 पोस्टर विशेष रूप से बांग्लादेश के हालात पर रोशनी डालते हैं, जबकि बाकी के 15 पोस्टर पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में होने वाले कथित अत्याचारों और दमन को दर्शाते हैं। आयोजकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के मंच के पास यह आयोजन करने का मकसद वैश्विक समुदाय को यह बताना है कि आम लोग, अल्पसंख्यक और गरीब समुदाय किस तरह से मुश्किल हालातों का सामना कर रहे हैं।
बांग्लादेश और पाकिस्तान के हालात पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनी के दौरान बांग्लादेश के पूर्व सांसद अबू सईद अल महमूद स्वप्न ने सभा को संबोधित करते हुए कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम की याद दिलाते हुए कहा कि इतिहास के उन काले अध्यायों को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी चरमपंथी ताकतों को बढ़ावा दिया जा रहा है और देश में कानून-व्यवस्था व लोकतांत्रिक स्वतंत्रता खतरे में है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के शासन और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर ध्यान दें।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मुखर आवाज
इस आयोजन में शामिल मानवाधिकार कार्यकर्ता रहमान खलीलुर मामून ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी के जरिए वे साधारण नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। मामून ने पाकिस्तान के भीतर बलूच, सिंधी और अन्य समुदायों के सामने आ रही चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1971 के नरसंहार के जख्म आज भी ताजे हैं और पीड़ित समुदाय न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
यह प्रदर्शनी ऐसे समय में आयोजित की गई है जब जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सत्र चल रहा है। इस मंच के माध्यम से आयोजकों ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करने का प्रयास किया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के हालात में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।